इबादतों के महीने रमजान में घरों से लेकर मस्जिदों तक दुआख्वानी व कुरान की तिलावत का दौर जारी है। रमजान के दूसरे दिन भोर में शिया और सुन्नी समुदाय के रोजेदारों ने सहरी की। इसके बाद दिन भर रोजा रखा गया।
बृहस्पतिवार को शहर भर की मस्जिदों से सुबह सहरी करने का ऐलान हुआ। इसके बाद घरों व मस्जिदों में लोगों ने सहरी की। इसके बाद दिन भर रोजा रखा और मगरिब की नमाज के बाद नमाजियों ने कोरोना महामारी से निजात व मुल्क में अमनो आमान की दुआएं मांगीं। दस्तरख्वान पर एक से बढ़कर एक लजीज पकवान करीने से सजाए गए थे। शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए रोजेदार बैठे। मगरिब की अजान की सदा बुलंद होते ही रोजेदारों ने खजूर व शर्बत से रोजा खोला।
खान-पान व प्रतिरोधक क्षमता का रखें ख्याल
मुकद्दस महीना रमजान की शुरुआत इस बार भीषण गर्मी में हुई है। तपिश के साथ कोरोना संक्रमण भी रोजेदारों के सब्र का इम्तेहान ले रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बताया कि रोजे के दौरान स्वास्थ्य और संक्रमण से बचाव के लिए कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। रोजेदार अपने खान-पान, आहार-विहार पर ध्यान दें।
कोरोना से बचाव के लिए घर में ही रहें और अल्लाह की इबादत करें। बहुत जरूरी होने पर ही भीड़ में निकलें।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम न हो इसलिए खाने में विटामिन सी युक्त पदार्थों जैसे नींबू, संतरा, मौसमी, नारंगी के साथ मौसमी फलों, साबुत अनाज, शर्बत, रस, दूध एवं दही को शामिल करें।
सहरी व इफ्तार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, फाइबर, पोटैशियम एवं लवणयुक्त भोज्य पदार्थों का संतुलित रूप से सेवन करें। घी, तेल, मसालों, ज्यादा नमक वाली चीजों के सेवन से बचना चाहिए।
गर्भवती एवं बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं, अशक्त बुजुर्गों, अनियंत्रित मधुमेह या रक्तचाप के रोगियों, बच्चों सहित कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति रोजा रखने से बचें।
भीषण गर्मी में शरीर में पानी, लवण की मात्रा की कमी न हो इसके लिए इफ्तार एवं सहरी में नींबू-पानी, शर्बत, तरबूज, खीरा, ककड़ी, केला का भरपूर सेवन करें। कोशिश करें कि कम से कम 10 गिलास पानी अवश्य पियें।
कोरोना बीमारी से बचाव के लिए 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग टीका जरूर लगवाएं। इससे रोजे से होने पर भी कोई दिक्कत नहीं आती है।