रामपंथ के आचार्य अखंड भारत की सांस्कृतिक सीमाओं को जोड़ने के लिए सांस्कृतिक आंदोलन चलाएंगे। देश को एकसूत्र में बांधने के लिए काशी से रामपंथ के आचार्य देश के गांव-गांव तक जाएंगे। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने दी। शनिवार को वह लमही स्थित श्रीराम आश्रम में रामपंथ की कार्ययोजना का शुभारंभ करने काशी पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि रामपंथ सभी धर्मों, जातियों, पंथों के बीच सेतु की तरह काम करके सबको जोड़ने का काम करेगा। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के जरिए रामपंथी जाति वैमनस्य को खत्म करने, धार्मिक हिंसा से समाज को मुक्त कराने और स्थायी रूप से शांति की स्थापना करने की योजना पर कार्य होगा। इस दौरान इंद्रेश कुमार द्वारा लिखी गई पुस्तक छूआछूत मुक्त समरस भारत का लोकार्पण किया गया।
उन्होंने कहा कि रामपंथ का अपना विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जहां भारतीय विद्याओं को प्रमुखता दी जाएगी। श्रीराम आश्रम के प्रमुख डॉ. राजीव ने कहा कि जनवरी में रामपंथ के लोग देशभर से काशी में जुटेंगे।
इस दौरान चट्टो बाबा, अर्चना भारतवंशी, प्रो. एसपी सिंह, नाजनीन अंसारी, नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, मो. अजहरूद्दीन, डॉ. मुकेश प्रताप सिंह, इली भारतवंशी, खुशी भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, ताजिम आदि मौजूद रहे।