मुकद्दस माह-ए-रमजान सिर्फ मुसलमानों के लिए ईद की बेपनाह खुशियां लेकर नहीं आता बल्कि मस्जिदों और मदरसों के लिए भी ये महीना रौनक लेकर आता है।
दरअसल मस्जिदों और मदरसों की तामीर से लेकर, वहां बच्चों की मुकम्मल तालीम का इंतजाम अवाम से मिले चंदे और जकात से होती है और इन मदरसों व मस्जिदों पर अवाम की ये इनायत पाक रमजान के बहाने ही होती है।
रमजान में बंदे अल्लाह की राह में दिल खोलकर न सिर्फ गरीबों की मदद करते हैं बल्कि मदरसों और मस्जिदों में चंदे और जकात भी खूब देते हैं।
इस लिहाज से मदरसों और मस्जिदों के लिए चंदे मांगने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बतादें कि मदरसों में बच्चों की तालीम, उनके रहने और खाने का इंतजाम इन्हीं चंदों की बदौलत ही होता है।