एक त्योहार पर तकरीबन 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। लहुराबीर के मिठाई विक्रेता शुभम यादव बताते हैं कि चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाइयों की लागत बढ़ गई है, जिसके कारण मिठाइयों की कीमत बढ़ाना मजबूरी हो गई है। गोदौलिया, चौक, मैदागिन, लंका, अर्दली बाजार, शिवपुर, पांडेयपुर, राजघाट, कचहरी और दशाश्वमेध समेत कई इलाके ऐसे हैं, जहां चाय की खपत सबसे अधिक होती है। चाय विक्रेताओं का कहना है कि कुछ दिनों में चीनी के दाम नियंत्रित नहीं हुए तो चाय की कीमत बढ़ाना मजबूरी हो जाएगी।
चौक के चाय विक्रेता राजेश यादव बताते हैं कि चाय के दाम बढ़े तो कारोबार पर संकट खड़ा हो जाएगा। कारोबारियों के मुताबिक, वर्ष 2015 में चीनी के उत्पादन में गिरावट आने पर इसके दाम 34 रुपये से बढ़कर 38 रुपये प्रति किलोग्राम हुए थे, यानी तब केवल 4 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई थी। इसके मुकाबले पिछले 11 वर्षों में चीनी के दाम दोगुने से अधिक बढ़ चुके हैं।
महानगर उद्योग व्यापार समिति के अध्यक्ष अशोक जायसवाल बताते हैं कि त्योहारों के मद्देनजर मिठाई निर्माताओं, बेकरी संचालकों और कन्फेक्शनरी कारोबारियों के सामने उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। ग्राहकों के छिटकने के डर से वे तुरंत चाय की कीमत नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
आवक घटने से उछले दाम नवंबर से पहले राहत नहीं
विशेश्वरगंज भैरोनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता के अनुसार, थोक मंडियों में चीनी की आपूर्ति और आवक घटने के कारण कीमतों में यह तेजी आई है। वहीं, स्थानीय कारोबारी पंकज अग्रवाल का कहना है कि गन्ने की नई फसल और मिलों में नए पेराई सत्र की शुरुआत के बाद ही आपूर्ति पटरी पर लौटेगी। नई खेप की आवक नवंबर से पहले संभव नहीं दिख रही है।
चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सीमित आयात से तत्काल राहत मिल सकती है लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं बनाया जाना चाहिए। चीनी मिलों को चीनी, एथेनॉल और बायो-एनर्जी के इंटीग्रेटेड मॉडल पर मजबूत करना होगा। जमाखोरी रोकने के लिए रियल टाइम स्टॉक और प्राइस मॉनिटरिंग भी जरूरी है। किसान गन्ने का उत्पादन बढ़ाएं। - डॉ. स्मिता शाह, सदस्य, नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड, वाणिज्य मंत्रालय