येन बद्धोबलि राजा दानवेन्द्रो महाबल। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।। वैदिक मंत्रों की गूंज के साथ गुरुवार को भाइयों की कलाई पर बहनों की राखियां सजेंगी। इस बार रक्षाबंधन पर न तो ग्रहण की छाया है और न भद्रा का कोई झंझट। खास बात तो यह है कि सौभाग्य एवं शोभन योग में भाइयों की कलाई पर राखी बंधेगी। सावन माह में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग एक साथ बन रहा है।
भदैनी के ज्योतिषाचार्य आचार्य गोपाल शरण उर्फ राजा पांडेय का कहना है कि भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांधने के लिए मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार राखी बांधने के लिए काफी लंबा मुहूर्त मिलेगा। बहनें 15 अगस्त की सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6:01 मिनट तक राखी बांध सकेंगी। कुल 12 घंटे 58 मिनट का समय मिलेगा। शुभ मुहूर्त दोपहर में साढ़े तीन घंटे रहेगा।
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य आचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार गुरुवार को 12:55 बजे तक सौभाग्य योग है एवं उसके बाद शोभन योग लग रहा है। राखी बांधने के लिए पूरे दिन भर का समय मिल रहा है। रक्षाबंधन पर श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, बवकरण के साथ सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मकर राशि में होने से रक्षाबंधन को बेहद खास बना रहे हैं।