आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मकर राशि के स्वामी शनि और सूर्य आपस में समसप्तक योग बना रहे हैं। 29 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रक्षाबंधन पर शनि मीन और सूर्य कर्क राशि पर रहेंगे। इस पर्व पर आयुष्मान, स्थिर, सौभाग्य, बुधादित्य, हर्ष विपरीत राज, शकट, पाराशरी राज, विमल विपरीत राज और धन योग बन रहे हैं जो काफी फलदायी हैं।
शनि और मंगल होंगे आमन-सामने, होंगी बाधाएं दूर
शनि और मंगल के आमने-सामने आने से नौ पंचम योग बन रहे हैं। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार रक्षाबंधन के पहले ही शनि मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जबकि मंगल दो अगस्त को सिंह राशि छोड़कर कन्या राशि में जाएंगे। इस वजह से भाई-बहन के संबंध मधुर होंगे। उनके जीवन की बाधाएं दूर होंगी।
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ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.29 से 6.05 बजे तक, सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 6.06 से 8:20 बजे, विजय मुहूर्त सुबह 10:47 से मध्याह्न 11:58 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त मध्याह्न 11.59 से दोपहर 12.53 बजे तक रहेगा।
पांच चीजों से बनती है वैदिक राखी
रक्षाबंधन पर्व वैदिक विधि से मनाना श्रेष्ठ माना गया है। इसमें पांच वस्तुओं का विशेष महत्व है, जिनसे रक्षासूत्र का निर्माण होता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चंदन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन पांच वस्तुओं को रेशम के कपड़े में बांध दिया जाता है। इससे वैदिक राखी तैयार होती है।