पीठ के चेयर प्रोफेसर प्रो. श्याम कार्तिक मिश्र ने कहा कि एकात्म मानववाद का मूल्यांकन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक आयाम हैं। बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि पं. दीनदयाल ने भारत को विकास की राह पर लाने के लिए एकात्म मानववाद का चिंतन प्रस्तुत किया है। आरपी पाठक ने कहा कि पंडित जी ने अपनी कार्यशैली से लोगों के जीवन पर अमिट छाप छोड़ी।
उनका दर्शन समाज में समानता की बात करता है। इस दौरान रामसेवक पाठक, डॉ. अभिनव शुक्ला, प्रो. कौशल किशोर मिश्र, डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. स्वर्ण सुमन, डॉ. सीमा मिश्रा मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. वीके शुक्ला, संचालन प्रो. प्रवेश भारद्वाज और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आरपी पाठक ने किया। इस अवसर पर प्रो. एसके मिश्रा की पुस्तक समकालीन भारत में पुनर्विचार का विमोचन किया गया और निबंध व पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को राज्यपाल ने पुरस्कृत किया।