वाराणसी। रेलवे में कार्यशैली भी अजीब है। तीन माह से मंडुवाडीह स्टेशन को जहां अपना नाम नहीं मिला, वहीं डीरेका के नामकरण बनारस रखने का पत्र जारी होते ही इतनी तेजी दिखाई गई कि परिसर में अब सब जगह बनारस ही लिखा दिखाई दे रहा है। यहां तक कि मुख्य द्वार और एफसीआई गोदाम के रास्ते वाला द्वार पर भी बनारस हो गया है। इन दोनों मुख्य द्वार पर स्टील के दो बोर्ड और कारखाना सहित अन्य भवनों में रेट्रो साइनिंग बोर्ड लगाया गया है। कागजों में भी बनारस नाम हो गया है। नाम करण होने के साथ ही मुख्य प्रशासनिक भवन का नाम भी तत्काल बदल गया था।
अगस्त में मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बनारस रखने को हरी झंडी मिल गई थी। 18 सितंबर को मंडुवाडीह का नाम बदलने के साथ ही स्टेशन कोड एमयूवी की जगह बीएसबीएस कोड भी जारी हो गया था। इसके बाद स्टेशन के सभी जगहों पर बनारस स्टेशन का बोर्ड लगाया था। लेकिन ठीक दूसरे दिन ही फिर पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों ने तर्क दिया कि आरक्षण सिस्टम में कोड जनरेट नहीं होने के चलते वापस मंडुवाडीह किया जा रहा है। अब तक कोड सिस्टम में अपग्रेड नहीं हो सका। हालांकि इस मसले पर कोई रेल अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। रेलवे बोर्ड के पाले में गेंद फेंक कर शांत मुद्रा में हैं।