वाराणसी। मुंबई-सूरत सहित अन्य शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में कंफर्म टिकट पाने के लिए यात्री बेताब हैं। रेलवे के आरक्षण केंद्रों से निराश यात्रियों का फायदा टिकट जालसाज अवैध सॉफ्टवेयर इजाद करके उठा रहे हैं। तत्काल प्लस, रियल मैंगो अन्य सॉफ्टवेयर के जरिए टिकट दलाल कंफर्म तत्काल टिकट निकाल रहे हैं। स्लीपर का 600-900, वातानुकूलित तृतीय कोच का 1000-1500 और 2 एसी का 2000-2500 रुपये ले रहे हैं।
बृहस्पतिवार को पिंडरा से पकड़े गए टिकट जालसाज राजेश चौहान ने आरपीएफ कैंट को अहम जानकारी दी है। पिछले दो साल में एक लाख से अधिक मूल्य का टिकट निकालने वाले राजेश चौहान से मिले इनपुट के आधार पर आरपीएफ इस खेल के अन्य खिलाड़ियों की धर पकड़ को लेकर जाल बिछाना शुरू कर दिया है। वाराणसी सहित पूर्वांचल भर में इनका जाल फैला हुआ है।
रेलवे के आरक्षण काउंटर से तत्काल कोटा से मुंबई, सूरत, चेन्नई ट्रेन के लिए 2 से 3 टिकट ही निकल पा रही और तत्काल प्लस, रियल मैंगो सहित अन्य सॉफ्टवेयर से जालसाज एक बार में 20 से 25 टिकट निकाल रहे हैं।
ऐसे चल रहा खेल
आरक्षण कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार रेलवे की टिकट आरक्षण प्रणाली इस कदर धीमी है कि ट्रेन का तत्काल टिकट जब खुलता है तो तब बुकिंग कर्मी यात्री का नाम, पता अन्य विवरण भरते हैं। वहीं इंटरनेट पर बैठे जालसाज नाम, पता, यात्रा विवरण सहित सब फुलफिल करके बैठे रहते हैं, जैसे ही कोटा खुला की धड़ाधड़ टिकट निकलना शुरू होता है तो सीधे 20 से 25 टिकटों पर ही रुकता है। वहीं रेलवे के सिस्टम में तमाम जानकारी जब तक भरी जाती है तब तक पता चलता है कि कोटा ही खत्म हो गया। ऐसे में यात्रियों को निराशा ही हाथ लगती है और वह भी इंटरनेट टिकटिंग वालों से संपर्क साधते हैं।
अवैध सॉफ्टवेयर से जारी टिकटों की हेराफेरी रोकने को लेकर आरपीएफ अभियान चला रही है। लॉकडाउन से पूर्व 104 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के दौरान अवैध साफ्टवेयरों में एएनएमएस, लालमिर्ची, ब्लैक टीएस, टिकटॉक, आई-बाल, रेड बुल, मैक, एन-गेट, साईकिल, स्टार भी टू जैसे कई अवैध साफ्टवेयर पकड़े गए थे।-पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, पूर्वोत्तर रेलवे