पद्मश्री रघु राय को सम्मानित करते सीडीओ सुनील वर्मा
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आज के युवाओं में फोटोग्राफी के प्रति जुनून नहीं है। उससे प्रेम नहीं है। वह अपने आप को शिक्षित नहीं करना चाहते। बस कैमरा मिला और बन गए फोटोग्राफर। उक्त बातें मशहूर फोटोग्राफर पद्मश्री रघु राय ने शुक्रवार को बातचीत के दौरान कहीं।
वह दो दिवसीय नेशनल फोटोग्राफी वर्कशाप में प्रशिक्षण देने वाराणसी आए हैं। रघु राय ने कहा कि फोटोग्राफी एक साधना है और बेहतर फोटोग्राफर बनना है तो व्यक्ति को आंतरिक यात्रा करनी होगी।
रचनात्मक प्रवृत्ति को विकसित करना होगा और खुद को तकनीकी रूप से शिक्षित करना होगा। फोटोग्राफी में कोई नियम नहीं होते हैं। अगर आप नियम का पालन करते हैं तो उसमें फंस जाते हैं। नियमों के पार जाकर फोटोग्राफी करनी चाहिए बेहतर परिणाम मिलेंगे।
अपने आलोचक खुद बनें तब आपकी आत्मा आपको बताएगी कि आपने जो तस्वीर क्लिक की है वह सही है या नहीं। खुद के मेन आब्जेक्ट के सवाल पर उनका कहना था कि मेरा सारा फोकस इंसानों पर ही होता है क्योंकि मैं उनमें से एक हूं।
क्रिएटिव फोरम की ओर से दो दिवसीय नेशनल फोटोग्राफी वर्कशाप का उद्घाटन शुक्रवार को मलदहिया स्थित होटल हिन्दुस्तान में किया गया। मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने वर्कशाप का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी के लिए दिल से सोचना जरूरी है पहले दिल से सोचो फिर से दिमाग लगाओ। पैशन खुद के लिए है और प्रोफेशन दूसरों के लिए। पैशन आपको जिंदा महसूस कराता है।
लेंस और फोटोग्राफी की मिली जानकारी
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वर्कशाप के दौरान प्रतिभागियों को लेंस और फोटोग्राफी के बारे में जानकारी दी गई। रघु राय ने प्रतिभागियों को बताया कि सब्जेक्ट को चूज करते समय क्या सावधानियां बरतें। रंग संयोजन और लाइट का कांबिनेशन भी बताया गया। राय ने प्रतिभागियों को फोटोग्राफी की बारीकियों से अवगत कराया।
उन्होंने स्ट्रीट फोटोग्राफी पर बोलते हुए कहा कि अगर आप इसमें बोर हो जाते हैं तो फिर यह आपके लिए नहीं है। इसमें हर सेकेंड कोई न कोई घटना होती है और उसे आपको कैप्चर करना होता है।
वर्कशाप में नई दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, बैंगलोर, रायपुर, वाराणसी और जर्मनी के 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी को गंगा आरती की तस्वीरों का टास्क दिया गया। संचालन डॉ. अंशु शुक्ला ने किया।