सूर्य उपासना का पर्व लोलार्क छठ पर भदैनी स्थित प्राचीन लोलार्क कुंड में 17 सितंबर को स्नान होगा। संतान की प्राप्ति के लिए 10 से अधिक राज्यों के दंपती आस्था की डुबकी लगाएंगे। कुंड में स्नान बुधवार की मध्यरात्रि से ही शुरू हो जाएगा। दंपती मंगलवार को ही कुंड पर पहुंचने लगे। सोनारपुरा से अस्सी मार्ग पर लगे बैरिकेडिंग में दंपती कतारबद्ध देर रात तक एक किमी लंबी कतार लग गई।
प्रशासन की तरफ से वहां मुकम्मल तैयारी की गई है। 17 को सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक स्नान व पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त बन रहा है। स्नान के लिए एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ होगी।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 16 सितंबर को सुबह 8:55 बजे से अगले दिन सुबह 10:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के चलते 17 को लोलार्क षष्ठी मनाई जाएगी। लोलार्क षष्ठी पर्व लक्खा मेले में शुमार है। स्नान के लिए मंगलवार से ही सोनारपुरा की तरफ और अस्सी की तरफ करीब ढाई किमी में बैरिकेडिंग की गई।
लोलार्केश्वर महादेव के महंत परिवार के पं. अजय शंकर पांडेय ने बताया कि बुधवार की रात में 11 बजे बाबा का रुद्राभिषेक व षोडशोपचार पूजन होगा। इसके बाद रात में 12 बजे के बाद से स्नान शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन रात तक चलेगा। यहां स्नान के लिए पूर्वांचल के अलावा दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से श्रद्धालु आएंगे।
मान्यतानुसार संतान प्राप्ति की कामना के लिए दंपती इस कुंड में स्नान करते हैं। स्नान के अलावा जिनको संतान की प्राप्ति हो गई है, वे मन्नत उतारने के लिए आते हैं।
इस बार सात साल बाद लोलार्क षष्ठी पर सात महायोग बन रहा है। इस दिन सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक स्नान और पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त है। सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से इस पर्व का कई गुना फल और बढ़ जाएगा।