उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के संसाधनों के प्रबंधन के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित किए जाने की जरूरत है, जो पारदर्शी होने के साथ जवाबदेह भी हो। समाज के प्रति उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए संसाधनों का सदुपयोग किया जाना चाहिए, ताकि उसका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
संवाद के दौरान मंदिरों की आय और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन में समाज की भागीदारी और पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, एक व्यवस्थित तंत्र के माध्यम से धार्मिक संस्थानों के संसाधनों का उपयोग सामाजिक कल्याण के कार्यों में अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटेरियन सीके त्रिवेदी ने की, जबकि संयोजन रोटेरियन अमित गुप्ता ने किया। इस मौके पर सतीशचंद जैन, डॉ. आरके जायसवाल, डॉ. राकेश मोहन, नर्वदानंद दूबे, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, वर्षा श्रीवास्तव, नितिन, दीपक माहेश्वरी, सुरेश खंडेलवाल और इंद्रसेन सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।