डीपीआर की लागत कम करने के लिए शासन की वित्त एवं व्यय समिति ने कई कामों को अलग कर दिया है। इसमें डीपीआर में जोड़ी गई जीएसटी को अलग कर दिया गया है। इसके अलावा फर्नीचर सहित अन्य कामों को हटाया गया है।
अलग-अलग पत्थरों मंदिर परिसर को भव्यता
डीपीआर के अनुसार मंदिर परिसर में मकराना मार्बल, ग्रेनाइट और चुनार के पत्थरों का उपयोग किया जाएगा। इसमें अलग-अलग आवश्यकता के अनुसार अलग पत्थर उपयोग में लिए जाएंगे। इसके अलावा पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाधान, जलपान गृह, लाइब्रेरी, मल्टीपरपज हाल सहित अन्य केंद्र विकसित होंगे। काशी विश्वनाथ धाम के तीनों प्रवेश द्वार पर जन सुविधा केंद्र स्थापित होंगे।
गंगा घाट से मंदिर के बीच दो एस्केलेटर
गंगा स्नान कर सीधे काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था होगी। गंगा घाट से मंदिर के बीच दो एस्केलेटर होंगे। इनमें श्रद्धालु आसानी से चढ़ाई के बिना ही ऊपर आ जाएंगे।
मंडलायुक्त, दीपक अग्रवाल ने बताया कि राजकीय निर्माण निगम की जगह लोक निर्माण विभाग को काशी विश्वनाथ धाम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीडब्ल्यूडी की अलग इकाई इसमें काम करेगी। डीपीआर मंजूर होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।