डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि हर एक इंसान में 400 तरह के गुण होते हैं। हालांकि भारतीय परिवार में तीन ही ट्रेंडिंग गुण हैं- इंजीनियर, डॉक्टर और आईएएस बनने का। यदि आप कुछ अलग करना चाह रहे हो और परिवार के सदस्य अपनी इच्छा लेकर बैठे हैं तो आपको लगेगा कि मैं गलत घर या गलत समय में पैदा हो गया हूं। फिर स्टेटस पर डाल दोगे कि मैं परेशान हूं। इसके बाद भी आपको सहानुभूति भी नहीं मिलेगी। ब्रेन का काम है लॉजिकल सोचना, लेकिन आप इमोशनल होकर सोचते हो।
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क्यों परीक्षा आते ही गुल हो जाती है दिमाग की बत्ती
परीक्षा आते ही दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। शुरू के 10 से 15 मिनट तक कुछ आता ही नहीं है। क्योंकि हमारे दिमाग के अगले हिस्से प्री फेंडल कॉर्टेक्स में डर की वजह से कुछ समझ ही नहीं आता हालांकि बाद में दिमाग अपने आप को ढाल लेता है। आप लोग अपने दिमाग को कंट्रोल कर सकते हो।
अहम (इगो) एक तरह से ट्रैफिक पुलिस जैसा होता है। इसके आवागमन को कंट्रोल कर लोगे तो ये आपको कई फायदे देगा। मानव होने के नाते हम इच्छा रख सकते हैं, लेकिन अपनी डिमांड नहीं पेश कर सकते। ये कई तरह के तनाव कम कर देता है। दिमाग तनाव नहीं झेल पाता तो वो शरीर पर असर डालता है। जांच कराओगे तो रिपोर्ट नॉर्मल आएगी। हो सकता है उल्टी और पेट दर्द भी हो। ऐसे केस बहुत आते हैं। अलग-अलग पड़ावों में आने वाले तनाव हमें मोटिवेट करते हैं।
पहले नहीं होता था डिप्रेशन
प्राचार्य डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि रील वाली बात बच्चों ने सबसे कम तालियां बजाईं, क्योंकि आप सभी रील देखते हो। हमारे समय में किसी भी बच्चे को तनाव नहीं होता था, लेकिन आज हर बच्चे को डिप्रेशन और तनाव है। इसे हमें ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से खत्म करना होगा। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र पांडेय ने किया।