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संक्रमण समाप्त होने के बाद होनी चाहिए परीक्षाएं

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वाराणसी। अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के नए दिशा निर्देशों के आने के बाद देश के तमाम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं कुछ छात्र जिनकी परीक्षाएं अधूरी हैं वह परीक्षा देना चाहते हैं, लेकिन कुछ छात्र संक्रमण समाप्त होने के बाद परीक्षा देने के मूड में हैं।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मुख्य गृहपति डॉ. विनोद कुमार सिंह का कहना है कि यूजीसी का निर्णय व्यावहारिक है। छात्रों और शिक्षकों के जीवन को खतरे में डालकर परीक्षा कराना उचित नहीं होगा। कोरोना संक्रमण की स्थितियां अगर सामान्य हो जाएं तभी परीक्षाएं कराई जानी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन की तैयारियां पूरी है। 20 फरवरी से ही परीक्षाएं आयोजित की जा रही थीं और बहुत से विषयों की परीक्षाएं तो हो चुकी हैं। एक दो पेपर ही बचे थे। एमए चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू नहीं हो सकी थीं। हालांकि इसमें छात्रों की संख्या बेहद कम है। बिना परीक्षा कराए अंतिम वर्ष की डिग्री उचित नहीं है।
बीए की छात्रा स्नेहा सोनी का कहना है कि अंतिम वर्ष की परीक्षा होनी चाहिए। अगर सभी पास हो जाएंगे तो भविष्य में कंपीटीशन बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
बीकाम की छात्रा आरुषी सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान परीक्षा कराने का निर्णय गलत है। दूसरे शहर में रहने वाले विद्यार्थी कैसे परीक्षा देने आएंगे।
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बीकॉम के छात्र अब्दुल फिरोज खान का कहना है कि संक्रमण का प्रसार तेजी से हो रहा है। ऐसी हालत में परीक्षा कराना मतलब जान से खेलना है।
बीसीए के छात्र संचित मिश्रा का कहना है कि वर्तमान हालात में तो परीक्षा कराना मुश्किल है। स्थितियां सामान्य होने पर ही परीक्षाएं आयोजित कराई जाएं।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष शिवम शुक्ला ने अंतिम वर्ष की परीक्षा कराए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में देश के कई राज्यों और विदेशों के छात्र अध्ययन के लिए आते हैं। संक्रमण की जो रफ्तार है ऐसी हालत में परीक्षा का मतलब जान से खेलना है।
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