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UP: एक साल से चल रही प्रक्रिया, पंजीकरण एक भी नहीं, एक लाइसेंस पर 10 नावें; काशी में बढ़ रही नावों की संख्या

Sun, 31 May 2026 10:37 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया एक वर्ष से चल रही है, लेकिन अब तक एक भी नाव का पंजीकरण नहीं हो सका है। गंगा में नावों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन एक लाइसेंस पर 10 नावों के संचालन की व्यवस्था लागू करने के साथ 100 इलेक्ट्रिक और मोटरबोट को सीएनजी में परिवर्तित कर चलाने की योजना बना रहा है।
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काशी में बढ़ रही नावों की संख्या। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Varanasi News: गंगा में चल रही नावों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया एक साल से चल रही है, लेकिन एक भी नाव को लाइसेंस नहीं मिला है। पुराने एक नाव के लाइसेंस पर नाविक 5 से 10 नाव चला रहे हैं। इस कारण गंगा में ट्रैफिक भी बढ़ा है।

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स्थानीय पुलिस इनकी नाव जब्त भी नहीं कर पा रही है। गंगा में बेलगाम नावों की संख्या से आए दिन घटनाएं और मारपीट किसी भी दिन बड़े हादसे का रूप ले सकती है। नौका विहार में बंपर कमाई के चलते कई नई बड़ी नावें गंगा में उतरने के लिए लाइन में हैं। नगर निगम की ओर से महज 1217 नावों को ही लाइसेंस जारी किया गया है, जबकि संचालन 4000 से अधिक नावों का हो रहा है। 

दरअसल लाइसेंस देने का अधिकार पहले नगर निगम को था। डेढ़ साल से आरटीओ और आईडब्ल्यूएआई को जिम्मेदारी दी गई है। जब से काम इन दो विभागों को मिला है तभी से लाइसेंस की प्रक्रिया शिथिल पड़ गई है। हालांकि, नाविकों की मनमानी पर कार्रवाई में जल पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ रही। आए दिन नावों का चालान किया जा रहा है। पुलिस को यह समस्या हो रही है कि नावों को जब्त करने की कोई जगह नहीं है। नाविक सभी नावों को एक जैसा रंग दे रहे हैं जिससे किस नाव का चालान हुआ है पहचानना मुश्किल हो जा रहा है।

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नाव की संख्या बढ़ने से गंगा में बढ़ा ट्रैफिक : गंगा में नावों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक बढ़ गया है। इस समय मौसम सामान्य न होने से बहुत नावें नहीं दिख रही हैं। ट्रैफिक और सवारियों की ओवरलोडिंग के कारण आए दिन घटनाएं हो रही हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक तीन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। 

100 इलेक्ट्रिक और सीएनजी बोट चलाने की सरकारी योजना के तहत गंगा में आने वाले समय में 100 इलेक्ट्रिक नावों को लांच किया जाएगा। मोटरबोट को सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। इसे माझी व नाविक समाज के लोगों की सहभागिता से योजना से जोड़ा जाएगा। इसके लिए बीते दिनों मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बैठक भी हुई है।

10 साल में 2 प्रयोग, 40 करोड़ खर्च, मोटर बोट का हल नहीं
गंगा में लाख प्रयासों के बाद भी प्रशासन और अन्य विभागों को मोटर बोट का विकल्प नहीं मिल पाया है। इसके लिए पिछले 10 वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2017 में नावों पर सोलर सिस्टम और 2021 से 2023 तक सीएनजी इंजन लगाए गए, लेकिन इनमें से कोई भी प्रयोग सफल नहीं हो सका। 

मौजूदा समय में गंगा में डीजल वाली मोटर बोट ही संचालित हो रही हैं, जिनसे होने वाले प्रदूषण का अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकल पाया है। वर्ष 2017 में टाटा की एसोसिएट कंपनी टेरा की ओर से 40 नावों का चयन कर उन पर सोलर पैनल लगाए गए थे। इसमें प्रति नाव करीब सात लाख रुपये खर्च हुए। 
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इन नावों का संचालन बिना आवाज और धुएं के हो रहा था, लेकिन समस्या यह थी कि पानी के तेज बहाव के विपरीत दिशा में नाव चलाने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती थी। कुछ दिनों तक संचालन के बाद यह प्रयोग बंद हो गया। वर्ष 2021 में स्मार्ट सिटी वाराणसी ने नया प्रयोग करते हुए नावों में सीएनजी इंजन लगवाने शुरू किए। 

करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर 600 नावों के इंजन को सीएनजी में परिवर्तित किया गया। हालांकि यह योजना भी सफल नहीं हो सकी, क्योंकि इन इंजनों के पार्ट्स उपलब्ध नहीं हो रहे थे। बाद में नाविकों ने सीएनजी इंजन हटाकर फिर से मोटर बोट से नाव संचालन शुरू कर दिया। दोनों ही परियोजनाओं में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। 

वर्तमान में मोटर बोट से निकलने वाले धुएं और तेज आवाज से यात्रियों को परेशानी होती है, लेकिन इस ओर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एआरटीओ प्रशासन, मनोज प्रसाद वर्मा ने बताया कि गंगा में संचालित सभी नावों को सबसे पहले लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है। सीएनजी या सोलर विकल्प की संभावनाओं को देखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
नावों के लाइसेंस के लिए पोर्टल की शुरुआत कर दी गई है। लाइसेंस की प्रक्रिया भी जल्द पूरी कराई जाएगी। बिना लाइसेंस के किसी भी नाव को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। - राघवेंद्र सिंह, आरटीओ प्रशासन
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