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लोकसभा चुनाव 2019 : बड़ी चुनौतियों से भरी है पूर्वांचल की राह, इस बार खाता खोल पाएगी कांग्रेस!

Mon, 25 Mar 2019 04:57 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : pti
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प्रियंका गांधी ने 140 किलोमीटर की गंगा यात्रा में कई समीकरणों को साधने का प्रयास किया। चाहे 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का मुद्दा हो या मुस्लिम समाज को साथ लेने की कवायद या पिछड़ी जातियों का मामला, हर मोर्चे पर चुनौतियां बड़ी हैं। प्रयागराज से भदोही होते हुए वाराणसी के दौरे में वह जिससे भी मिलीं एक अलग छाप छोड़ीं। 

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मिर्जापुर और भदोही में 'सांची बात प्रियंका के साथ' कार्यक्रम में प्रियंका ने गंगा किनारे रहने वाले हर वर्ग से मुलाकात करने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होंने बिखरे कांग्रेसियों को तलाशने और साधने में ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने वोटरों से ज्यादा गांवों-कस्बों के पुराने नेताओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया। प्रियंका के तीन दिनों के दौरे में कई पुराने कांग्रेसी नेता भी नजर आए।

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी के सामने कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी भी खुलकर आई। बनारस में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुझे तो अभी यहां बहुत काम करना बाकी है। किसी जमाने में कांग्रेस का मजबूत गढ़ माने जाने वाले पूर्वांचल में पार्टी लंबे समय से अपनी जमीन तलाश रही है।

 

वाराणसी सहित पूर्वांचल की ज्यादातर सीटें कांग्रेस की परंपरागत रही हैं। मगर दो दशक से कांग्रेस का जनाधार गिर गया है। ऐसे में प्रियंका गांधी के सामने पूर्वांचल की जमीन को मजबूत करने के साथ ही कांग्रेस की सियासत में नई ऊर्जा लाने की चुनौती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे जो कार्यकर्ता और नेता लोग घरों में बैठे थे, प्रियंका गांधी के आने के बाद वो सक्रिय हुए हैं।

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2014 में नहीं खुला था कांग्रेस का खाता

पूर्वांचल में 21 जिले और लोकसभा की 26 सीटें हैं। 2014 के चुनाव में यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था जबकि भाजपा ने 23 सीटों पर कब्जा जमाया था। अपना दल को दो और सपा को एक सीट मिली थी। यहां तक कि 2018 में हुए उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा में कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। 21 जिलों वाले पूर्वांचल में 2009 में कांग्रेस ने चार सीटें हासिल की थी जबकि भाजपा ने नौ लोकसभा क्षेत्रों में कब्जा जमाया था। कांग्रेस ने अपनी इसी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए प्रियंका को पूर्वांचल में उतारा है।
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यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल जीतना जरूरी

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्वांचल में कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं थी।

पूर्वांचल में विधानसभा की 130 सीटों पर मोदी लहर में भाजपा ने सबसे ज्यादा 87 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट कुशीनगर के तमकुहीराज की मिली। अपना दल की 9, सपा की 14 और बसपा की 10 सीटें हैं।

पूर्वांचल की लोकसभा सीटें : वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बांसगांव, फैजाबाद, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, डुमरियागंज, महाराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, सलेमपुर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़। 
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