पूर्वांचल में 21 जिले और लोकसभा की 26 सीटें हैं। 2014 के चुनाव में यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था जबकि भाजपा ने 23 सीटों पर कब्जा जमाया था। अपना दल को दो और सपा को एक सीट मिली थी। यहां तक कि 2018 में हुए उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा में कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। 21 जिलों वाले पूर्वांचल में 2009 में कांग्रेस ने चार सीटें हासिल की थी जबकि भाजपा ने नौ लोकसभा क्षेत्रों में कब्जा जमाया था। कांग्रेस ने अपनी इसी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए प्रियंका को पूर्वांचल में उतारा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्वांचल में कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं थी।
पूर्वांचल में विधानसभा की 130 सीटों पर मोदी लहर में भाजपा ने सबसे ज्यादा 87 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट कुशीनगर के तमकुहीराज की मिली। अपना दल की 9, सपा की 14 और बसपा की 10 सीटें हैं।
पूर्वांचल की लोकसभा सीटें : वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बांसगांव, फैजाबाद, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, डुमरियागंज, महाराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, सलेमपुर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़।