जिले में निजी कोविड अस्पतालों में मरीजों के इलाज के खर्चे की मनमानी रोकने के लिए जिलाधिकारी ने सभी अस्पतालों में खर्च की सूची जारी करने के आदेश दिया था, लेकिन निजी अस्पतालों ने जैसे-तैसे स्वास्थ्य सीएमओ कार्यालय में तो किसी तरह कॉपी दे दी लेकिन कई निजी अस्पतालों में बृहस्पतिवार को सूची नहीं दिखाई दी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में आठ सरकारी अस्पताल और 52 निजी अस्पतालों को कोविड हास्पिटल बनाया गया है। हालत यह है कि शासन की ओर से तो 13 अप्रैल को शासनादेश जारी कर इलाज के खर्चे नियमानुसार हर दिन 10,000 से लेकर 18000 तक तय किए गए हैं। इसमें डॉक्टर के राउंड लेने पीपीई किट, जरूरी दवाइयां आदि का निर्धारण भी किया गया है। निजी अस्पतालों की मनमानी यह है कि 18000 हर दिन कौन कहे, रोजाना मरीजों से 25 से 30 हजार का बिल इलाज के नाम पर लिया जा रहा है। कई अस्पतालों ने शासन की दर को ही फिर से रेट लिस्ट बनाकर सीएमओ आफिस में जमा कर दिया है।
जिला प्रशासन कर सकता है रेट का निर्धारण
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज में मनमानी रोकने के लिए जिला प्रशासन रेट का निर्धारण कर सकता है। माना जा रहा है कि शासनादेश में दी गई सुविधाओं के अलावा इलाज में लगने वाले अन्य खर्चो के मूल्यांकन के बाद आईसीयू, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर वाले बेड के लिए जल्द ही एक निश्चित रेट का भी निर्णय लिया जा सकता है, जिससे कि मरीजों को राहत मिल सके।