प्रधानमंत्री की खास अपील : क्या इस योजना से बदल जाएगी किसानों की किस्मत? 10 दिन में चौथी बार पीएम ने इसका जिक्र किया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 14 Dec 2021 06:58 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी में सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान के 98वें वार्षिकोत्सव को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने मंच से एक नए जन आंदोलन को शुरू करने की अपील की। पढ़िए कब, कैसे और क्यों जन आंदोलन कराना चाहते हें पीएम...?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के वाराणसी दौरे पर हैं।
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार 13 दिसंबर से दो दिनों के वाराणसी दौरे पर हैं। आज उनके दौरे का आखिरी दिन था। ऐसे में प्रधानमंत्री ने पहले 13 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की और फिर एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने पहुंच गए। ये जनसभा सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान की ओर से 98वें वार्षिकोत्सव समारोह पर आयोजित की गई थी। इसमें प्रधानमंत्री ने काशी से लेकर केदारनाथ और अयोध्या तक का जिक्र किया। काशी के विकास यात्रा के बारे में बताया।
मोदी ने कहा कि 2013-14 से अगर तुलना करें तो 2019-20 में काशी में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हुई है। यही नहीं, काशी की संकरी गलियों को चौड़ा किया गया है। काशी अब विकास का नया उदाहरण बनता जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम की खूबसूरती देखते बनती है। वाराणसी स्टेशन, गदौलिया के सौंदर्यीकरण की तारीफ की। बोले, अगर इच्छा शक्ति हो तो बदलाव आ सकता है। यही विश्वास अब पूरे देश में देखने को मिल रहा है।
इस बीच प्रधानमंत्री ने मंच से एक जन आंदोलन शुरू करने की लोगों से अपील की। ये पहली बार नहीं था, जब प्रधानमंत्री ने इस जन आंदोलन की बात कही हो। पिछले 10 दिन के अंदर मोदी ने सार्वजनिक मंच से चार बार इसका जिक्र किया है।
पढ़िए इस जन आंदोलन के बारे में...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के वाराणसी दौरे पर हैं।
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार 13 दिसंबर से दो दिनों के वाराणसी दौरे पर हैं। आज उनके दौरे का आखिरी दिन था। ऐसे में प्रधानमंत्री ने पहले 13 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की और फिर एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने पहुंच गए। ये जनसभा सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान की ओर से 98वें वार्षिकोत्सव समारोह पर आयोजित की गई थी। इसमें प्रधानमंत्री ने काशी से लेकर केदारनाथ और अयोध्या तक का जिक्र किया। काशी के विकास यात्रा के बारे में बताया।
मोदी ने कहा कि 2013-14 से अगर तुलना करें तो 2019-20 में काशी में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हुई है। यही नहीं, काशी की संकरी गलियों को चौड़ा किया गया है। काशी अब विकास का नया उदाहरण बनता जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम की खूबसूरती देखते बनती है। वाराणसी स्टेशन, गदौलिया के सौंदर्यीकरण की तारीफ की। बोले, अगर इच्छा शक्ति हो तो बदलाव आ सकता है। यही विश्वास अब पूरे देश में देखने को मिल रहा है।
इस बीच प्रधानमंत्री ने मंच से एक जन आंदोलन शुरू करने की लोगों से अपील की। ये पहली बार नहीं था, जब प्रधानमंत्री ने इस जन आंदोलन की बात कही हो। पिछले 10 दिन के अंदर मोदी ने सार्वजनिक मंच से चार बार इसका जिक्र किया है। पढ़िए इस जन आंदोलन के बारे में...
क्या बोले प्रधानमंत्री ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
- फोटो : अमर उजाला
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी गोधन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया के बारे में बता रहे थे। उन्होंने कहा, 'गो धन को हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक स्तंभ बनाने के लिए देश में अनेक प्रयास हो रहे हैं। हमारा गोधन हमारे किसानों के लिए केवल दूध का ही स्त्रोत न रहे, बल्कि ये प्रगति के अन्य आयामों में भी मदद करे।'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'आज दुनिया स्वास्थ्य को लेकर सजग हो रही है। केमिकल को छोड़कर ऑर्गेनिक फार्मिंग की तरफ विश्व लौट रहा है। हमारे यहां गोबर कभी ऑर्गेनिक फार्मिंग का आधार होता था। हमारी उर्जा जरूरतों को भी पूरा करता था। आज देश गोबर धन योजना के जरिए बायो फ्यूल और आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दे रहा है। इन सबसे पर्यावरण की रक्षा भी हो रही है।'
मोदी ने इसके बाद जन आंदोलन का जिक्र किया। बोले, 'आज से दो दिन बाद 16 तारीख को जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग पर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। इसमें पूरे देश के किसान जुड़ेंगे। मैं चाहूंगा कि आप सभी भी 16 दिसंबर को प्राकृतिक खेती के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करें और बाद में घर-घर जाकर लोगों को इसके बारे में बताएं। यह ऐसा विषय है जिसे जन आंदोलन बनना चाहिए और इसमें आप सभी अहम भूमिका निभा सकते हैं।'
कब-कब और कहां पीएम ने किया जिक्र?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के वाराणसी दौरे पर हैं।
- फोटो : अमर उजाला
1. चार दिसंबर को देहरादून में पहली बार पीएम ने जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम का जिक्र किया था।
2. सात दिसंबर को गोरखपुर में दूसरी बार प्रधानमंत्री ने इस आयोजन में शामिल होने के लिए किसानों से कहा।
3. 11 दिसंबर को बलरामपुर में फिर से प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होकर इसे जन आंदोलन का रूप दें।
4. 14 दिसंबर को वाराणसी में प्रधानमंत्री ने फिर से अपनी बातों को दोहराया।
क्या है जीरो बजट प्राकृतिक खेती?
प्राकृतिक खेती।
- फोटो : अमर उजाला
जीरो बजट प्राकृतिक खेती करने का एक तरीका है जिसमें बिना किसी लागत के खेती की जाती है। इस पद्धति में बाहर से किसी भी उत्पाद का कृषि में प्रयोग नहीं किया जाता है। मसलन केमिकल युक्त खाद भी नहीं डाला जाता है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र का उपयोग करते हैं। प्राकृतिक खेती का कांसेप्ट महाराष्ट्र के सुभाष पालेकर ने दिया है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसके लिए देसी गाय का गोबर और और गोमूत्र प्रयोग में लाया जाता है। जिनसे बीजामृत, जीवामृत और घनजीवमृत जैसे जैविक मिश्रण तैयार किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री किसानों से प्राकृतिक खेती करने के लिए अपील कर रहे हैं। इसी को लेकर 16 दिसंबर को वह गुजरात के आणंद में नेशनल कॉन्क्लेव को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन में खतरनाक केमिकल से मुक्त खेती के भविष्य का रोडमैप तैयार होगा। मोदी हर कार्यक्रम में किसानों से इसी कॉन्क्लेव में जुड़ने की अपील कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती से जुड़ी खास बातें
- इस समय देश में प्राकृतिक खेती से 44 से अधिक लाख किसान जुड़ चुके हैं।
- 2003-04 में महज 76 हजार हेक्टेयर में ही ऐसी खेती हो रही थी। अब 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तरह की खेती होती है।
- 16 दिसंबर को गुजरात के आणंद में होने वाले कार्यक्रम में पांच हजार से अधिक किसान मौजूद रहेंगे।
- इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से संबंधित 85 केंद्रीय संस्थान और 600 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) शामिल होंगे।