कालीन उद्यमी सुमित सिंह कहते हैं कि नई अवधारणा को अभी समझने की जरूरत है। कारोबार के लिए स्थानीय स्तर पर कोई बाजार नहीं है। सुरेश मिश्र कहते हैं कि या तो सरकार देश के अन्य हिस्सों में इसके लिए बाजार तैयार करे, नहीं तो उद्योग मर सकता है।
नफा-नुकसान के बाजार में बुनकरों का घाटा
देश के 12 हजार करोड़ के कालीन निर्यात में बुनकरों की सेहत हमेशा से खराब रही है। अब भी डेढ़ से दो सौ मंजूरी में ही बुनकर काम करते हैं। कोरोना के चलते लॉकडाउन में कारोबार पर असर पड़ने से यह काम धाम भी बंद पड़ा है। सरकारी इमदाद से काम चलाया जा रहा है।