पीएम के गोद लिए गांव जयापुर और नागेपुर के किसानों को अब तक बीमा की धनराशि नहीं मिली है। नाराज कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने बीमा कंपनी को जल्द से जल्द भुगतान कराने को कहा।
गुरुवार को सर्किट हाउस में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की हुई समीक्षा में संयुक्त सचिव ने कहा कि जनसेवा केंद्रों के माध्यम से किसान लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लोन लेने वाले किसानों को डीबीटी से जोड़ा जाएगा।
संयुक्त सचिव ने कहा कि पीएम और सीएम का जोर अधिक से अधिक किसानों का बीमा कराए जाने पर है। बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया कि रिपोर्ट के आधार पर क्षतिपूर्ति का भुगतान करें।
2016 में खरीफ की फसलों के 20090 किसानों के बीच 1,36,01,756.22 रुपये बांटा गया है। रबी में 13962 किसानों से 69,55,332.12 रुपये प्रीमियम जमा कराया गया था। वाराणसी में 8339.95 हेक्टेयर फसलों का बीमा हुआ था। इनमें से बीमित राशि 66.95 करोड़ है। 1.36 करोड़ रुपये प्रीमियम किसानों का अंश है। क्षतिपूर्ति के लिए 3073 किसानों को 1.54 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति दिया गया है।
बैंकों को बीमा कंपनी की ओर से बीमित किसानों की सूची देने को कहा। बैंकर्स ने कहा कि बीमा कंपनी के पास आधारभूत संरचना नहीं है। इनकी कार्यप्रणाली शिथिल है। क्राप कटिंग में भी बीमा कंपनी के लोग नहीं आते हैं। संयुक्त सचिव ने बीमा कंपनियों की उपस्थित रहने को कहा।
बैठक में संयुक्त कृषि निदेशक आरके यादव, उप कृषि निदेशक एके सिंह, जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य, लीड बैंक मैनेजर रंजीत सिंह आदि शामिल रहे।