प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए नित नए इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष बुलावा अभियान भी चलाया जा रहा है। बच्चों को मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ही कॉपी, किताब, ड्रेस के अलावा मिड-डे मील के तहत पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। फिर भी अभिभावकों का भरोसा प्राथमिक विद्यालयों पर नहीं हो पा रहा है। इसका प्रमाण पुलिस लाइन में स्थित प्राथमिक विद्यालय है, जहां कुल 99 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें पुलिसवालों के सिर्फ 2 बच्चे हैं।
जिले में 1143 प्राथमिक विद्यालयों में करीब 1.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। सभी विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम है। इस संख्या को बढ़ाने के लिए निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी अपेक्षानुसार वृद्धि नहीं हो रही है। इसका एक कारण यह भी है कि सरकारी कर्मचारी, उद्योगपति, व्यापारी हों या आम आदमी, कोई भी अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ाने की बजाय कॉन्वेंट स्कूलों में भेजना चाहता है।
इसका प्रमाण पुलिस लाइन परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय है, जहां कुल छात्र संख्या 99 है। इस विद्यालय के आसपास केवल पुलिसकर्मी रहते हैं, लेकिन यहां केवल दो बच्चे ही पुलिस परिवार से हैं। सबसे अधिक बच्चे पांडेयपुर और महावीर मंदिर के आसपास रहने वाले सफाई कर्मचारियों के हैं, जिनकी संख्या करीब 50 है।
विद्यालय की प्रधानाचार्य मधुर श्रीवास्तव ने बताया कि बुलावा अभियान के तहत हर साल छात्रों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इस साल भी बच्चों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस परिवार से भी बच्चों का दाखिला कराने को लेकर अपील की जा रही है।