प्रेमचंद ने अपने साहित्य में मानव मन को बहुत सूक्ष्म तरीके से समाहित किया है। प्रेमचंद विरोध का समर्थन करते हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने अपने शोध पत्र पढ़े। संचालन रविनंदन सिंह और धन्यवाद ज्ञापन केपी गौडर ने किया। इस दौरान अंकित कुमार सिंह, डॉ. प्रीति, प्रो. निरंजन सहाय, प्रो. अनुराग कुमार, डॉ. रामाश्रय, डॉ. रविन्द्र पाठक, डॉ. प्रीति और शिवशंकर यादव मौजूद रहे।