भारतीय राष्ट्रीय महिला बास्केटबाल टीम की शूटिंग गार्ड प्रशांति सिंह युवा खिलाड़ियों के लिए आईकॉन हैं। बास्केटबाल में अर्जुन अवार्ड जीतने वाली भारत की तीसरी खिलाड़ी और प्रदेश की पहली महिला खिलाड़ी प्रशांति का सफर भी चुनौतियों से भरपूर रहा है।
उन्होंने बताया कि कई बार ऐसे मौके आए जब लगा कि खेलना छोड़ दूं लेकिन मेरी हिम्मत ने यह कभी गंवारा नहीं किया। 25 सालों के इस सफर के दौरान मिली सफलताओं के पीछे हर बार मां की दुआ और प्यार ने संबल दिया है।
2017 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित प्रशांति ने कहा कि मेहनत, समर्पण और त्याग हमारे सपनों को सच में बदल देते हैं। मैं आज जिस मुकाम पर हूं उसमें बनारस की मिट्टी और मेहनत का बहुत योगदान है।
युवा खिलाड़ियों से कहना चाहूंगी कि केवल ग्लैमर के पीछे न भागें। खुद की मेहनत पर भरोसा रखें और अपने लक्ष्य खुद निर्धारित करें। सफलता और शोहरत एक दिन की नहीं बल्कि समग्र और निरंतर मेहनत का नतीजा होती हैं।
सोशल मीडिया से खास दूरी बनाकर रखें क्योंकि ध्यान रखें कि मैदान पर ही आपका वास्तविक परीक्षा होती है। शक्ति की आराधना का यह पर्व है इसे पूजा पाठ तक ही सीमित नहीं रखें। स्त्री शक्ति की पूजा केवल नौ दिनों तक नहीं बल्कि उनका सम्मान हमेशा करें।