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UP News: यूपी कॉलेज स्कॉलरशिप में अव्वल, प्लेसमेंट में पीछे; 44 मानकों पर आधारित प्रमाण पोर्टल की रैंकिंग जारी

Sat, 30 May 2026 11:34 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: 44 मानकों पर आधारित प्रमाण पोर्टल की रैंकिंग जारी की गई। इसमें प्रदेश भर के जिलों में बनारस को आठवां स्थान मिला। पहले स्थान पर लखनऊ और दूसरे पर अलीगढ़ रहा। 
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यूपी कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंपस संस्कृति के विकास के लिए जरूरी 44 मानकों में उदय प्रताप कॉलेज को प्रदेश में पहला और बनारस को आठवां स्थान मिला है। एकेडमिक टाइम टेबल, समय से परीक्षा, रिजल्ट, स्कॉलरशिप, सोशल मीडिया एंगेजमेंट, ग्रीन कैंपस के चलते यूपी कॉलेज ने तीसरी बार प्रमाण पोर्टल पर प्रदेश में टॉप किया है। वहीं, प्लेसमेंट, इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग, रिसर्च प्रोजेक्ट, पेटेंट और वर्चुअल लैब जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों से पीछे हो गया है।

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उत्तर प्रदेश स्टेट डेटा सेंटर (यूपीएसडीसी) की ओर से शुक्रवार को रैंकिंग जारी की गई है। इसमें प्रदेश का औसत स्कोर 33.59 है, जो कि यह बताता है कि प्रदेश के कई महाविद्यालय अब भी खस्ताहाल हैं। बनारस से आगे लखनऊ, अलीगढ़, मिर्जापुर, मेरठ, चित्रकूट, कानपुर और गोरखपुर जिले हैं।

इस सूची में गोरखपुर का दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज 73.40 अंक के साथ दूसरे स्थान और कानपुर का पीपीएन कॉलेज 67.88 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मेरठ के इस्माइल नेशनल महिला पीजी कॉलेज को 66.62 अंक के साथ चौथे और अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज को 63.16 अंक के साथ पांचवां स्थान मिला है।

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डिजिटल पेमेंट, रिसर्च पेपर, लैब, पेटेंट का भी आकलन
प्रमाण पोर्टल को सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (क्रिस्प) की ओर से विकसित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के राजकीय, सब्सिडी और सेल्फ फाइनेंस महाविद्यालयों का हर महीने 44 बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट, शोध प्रकाशन, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, उद्योग सहयोग, स्वयं प्लेटफॉर्म, वर्चुअल लैब, पेटेंट, सोशल मीडिया सक्रियता और नैक संबंधी गतिविधियां शामिल हैं।
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उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ी जवाबदेही
यूपी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की है। प्रमाण पोर्टल ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही की नई संस्कृति विकसित की है। अब संस्थानों को नियमित रूप से अपनी उपलब्धियों और कमियों का आकलन करना पड़ रहा है। महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के आधार पर पाठन पाठन चल रहा है। 
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