जानकारी के अनुसार, जिले के 568 बैंक शाखाओं में मुद्रा योजना के बकायेदारों की सूची लंबी है। बैंकों का कहना है कि 120 करोड़ रुपये का एनपीए अब उनके खातों पर बोझ बन चुका है और इसकी आधी राशि डूबने की आशंका जताई जा रही है। परिणामस्वरूप, बैंक अब बिना गारंटी वाले ऋण देने से कतराने लगे हैं।
कई बैंक प्रबंधन अब इस तरह की योजनाओं में ऋण वितरण की प्रक्रिया को धीमा करने के पक्ष में हैं। वहीं, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) अविनाश अग्रवाल ने बताया कि बैंक अब भी रोजगारपरक योजनाओं के तहत लोन देने की नियमित प्रक्रिया अपना रहे हैं। जिन मामलों में ऋण एनपीए घोषित हो गया है, वहां बैंक अपने स्तर पर रिकवरी करा रहे हैं।
सबसे ज्यादा पैसे पीएम किशोर योजना में फंसे: पीएम मुद्रा योजना में सबसे बड़े बकायेदार किशोर योजना के अंतर्गत लोन लेने वाले हैं। इस योजना में बैंकों के 128.64 करोड़ रुपये फंसे हैं। बैंकों की ओर से 18098 खातों को एनपीए घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत बिना गारंटी के 50 हजार से 5 लाख तक का लोन रोजगार के लिए लोगों को दिया गया था।