कोरोना वायरस के नए-नए मामले मिलने को देखते हुए सैंपल की जांच की कार्रवाई भी तेज हो गई है। समय से रिपोर्ट आ सके, इसके लिए आईएमएस बीएचयू की माइक्रोबायोलॉजी लैब में बुधवार से पूल टेस्टिंग शुरू हो गई। बीएचयू की मार्च के पहले सप्ताह से लैब में वाराणसी, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, सोनभद्र, भदोही समेत 13 जिलों के सैंपल की जांच हो रही है।
अब तक वाराणसी से ही करीब 4000 सैंपल आ चुके हैं। वर्तमान में वाराणसी के करीब 300 सैंपल के साथ ही सभी जिलों को मिलाकर 600 से अधिक सैंपल की जांच रिपोर्ट आनी शेष है। इसी को देखते हुए पूल टेस्टिंग शुरू की गई है, ताकि रिपोर्ट समय से आ सके।
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कोरोना का टेस्ट
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ये है पूल टेस्टिंग
माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी प्रोफेसर गोपालनाथ ने बताया कि पूल टेस्टिंग में एक साथ चार-पांच लोगों के सैंपल की जांच की जाती है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इन सभी सैंपल की अलग-अलग जांच की जाती है। इससे फायदा यह होता है कि एक साथ चार-पांच सैंपल की जांच हो जाती है। इससे समय की बचत होती है।
कोरोना वायरस, बीएचयू।
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सैंपल लेने में बरतनी होती है सावधानी
माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी प्रोफेसर गोपाल नाथ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जो भी टीम सैंपलिंग के लिए जा रही है, उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है। सैंपल को डबल लेयर में रखना जरूरी है। अगर सैंपलिंग में थोड़ी सी भी गड़बड़ी होगी तो उसका असर रिपोर्ट पर पड़ेगा।