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कोयले की राख और धूल घोल रही हवा में जहर, प्रदूषण से हालात खराब

Thu, 21 Nov 2019 09:19 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में काले हीरे की खान के नाम से मशहूर ऊर्जांचल(सोनभद्र) में बढ़ते प्रदूषण से बच्चे और बुजुर्गों से लेकर युवा प्रदूषण से परेशान हैं। सड़कों से उड़ने वाली धूल और कोयले से पावर हाउस से उड़ने वाली राख ने फेफड़ों में कालिख घोल दी है।

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सोनभद्र सिंगरौली में अगर निर्देशों सुझावों पर प्रभावी अमल हो जाए तो यहां की तस्वीर बदल सकती है। एनजीटी के पूर्व में आए आदेश से लेकर अब तक कई निर्देश जारी हो चुके हैं। ठंड की शुरुआत में ही बड़े वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट नाराजगी जता चुका है। जिले से ब्लॉक के अफसरों की जिम्मेदारी तय कर लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके हालात खराब बने हुए हैं।

कोयला खनन, सड़क मार्ग से कोल परिवहन, असुरक्षित तरीके से औद्योगिक अवशेष्टों का बहाव, 23 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए रोजाना 3 लाख टन से अधिक कोयले की खपत और उससे करीब एक लाख टन निकलने वाली राख प्रदूषण का कारण माना जाता है।
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गड्ढों में तब्दील पर वाहनों की आवाजाही के चलते उड़ने वाली धूल, सड़क पर बढ़ते वाहन भी प्रदूषण के कारण बन रहे हैं। हालात यह हैं कि यहां जल और मृदा दोनों में प्रदूषण का जहर घुल चुका है। हवा में भी लगातार प्रदूषक (खतरनाक रासायनिक पदार्थ) तत्वों की मात्रा बढ़ रही है।

इसको देखते हुए ज्यादा आवागमन वाली सड़कों पर पानी का छिड़काव, टूटी सड़कों की मरम्मत, प्रभावितों को बेहतर उपचार, प्रदूषक तत्वों के ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण को लेकर राज्य सरकारों की ओर से निर्देश जारी हैं। इस सर्दी की शुरुआत में ही खराब हालात देख कई निर्देश जारी किए गए लेकिन मानकों का पर नियमित पालन तो दूर अब तक सड़क पर नियमित पानी के छिड़काव की मुकम्मल पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी है।

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक नवंबर को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए डीएम-एसपी सहित सभी संबंधित विभागाध्यक्ष को प्रदूषण नियंतत्र के निर्देश दिए थे। इसके बाद 2 नवंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नगर पालिका, नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों को कूड़ा ना जलने देने, जिला अग्निशमन अधिकारियों को परिवहन जनित धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी के छिड़काव के निर्देशजारी किए गए हैं।
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साथ ही एक्सईएन राजकीय निर्माण निगम, प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी, निर्माण खंड जल निगम, साडा, आरईएस, एनएचआई के क्षेत्रीय अधिकारी को भवन निर्माण से संबंधित भवन निर्माण, सड़क निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल पर जल छिड़काव को सुनिश्चित कराने, डीएसओ को होटलों-व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में लकड़ी एवं कोयला जलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए पत्र जारी किया गया। पाल्यूटेड पे फार्मूल के तहत रोजाना सड़कों पर पानी का छिड़काव, पटरियों की सफाई के निर्देश पहले से हैं।

सोनभद्र के  क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राधेश्याम त्रिपाठी ने बताया कि एनजीटी के आदेश और शासन डीएम के निर्देशन में प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों, परियोजना प्रमुखों को जरूरी कदम उठाने के लिए पत्र निर्देश जारी हैं। पूर्व में भी समय-समय पर निर्देश सुझाव जारी हुए हैं। अगर इस पर प्रभावी अमल हो जाए तो काफी हद तक हालात सामान्य हो जाएंगे।  
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