अब तक न टिकट तय और न ही चुनाव चिह्न
समाजवादी पार्टी में शीर्ष स्तर पर चल रही रार के बीच स्थानीय नेता और कार्यकर्ता उलझे हुए हैं।
चुनाव की तारीखें तय हो गईं और अब तक चुनाव चिह्न पर ही फैसला नहीं हो सका।
यही नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की ओर से जारी प्रत्याशियों की सूची के चलते भी दुविधा की स्थिति है। दोनों गुट चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना-अपना दावा करते हुए चुनाव आयोग में दस्तक दे चुके हैं।
साइकिल चिह्न किसे मिलेगा, यह तय नहीं है। ऊहापोह में फंसे प्रत्याशी इसी उलझन में बैनर-पोस्टर तक नहीं छपवा रहे हैं।
शिवपाल यादव ने जिले की सभी आठ विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसके बाद अखिलेश यादव ने अपनी अलग सूची जारी की। उन्होंने वाराणसी की दो सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे। शिवपुर से आनंद मोहन यादव गुड्डु और अजगरा से लालजी सोनकर को प्रत्याशी बनाया। लालजी का नाम शिवपाल यादव की सूची में भी था।
बहरहाल सभी प्रत्याशी और दावेदार पार्टी में चल रही रार के थमने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, सपा के जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव रोजाना अर्दली बाजार स्थित कार्यालय पहुंचते हैं और कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनते हैं। डॉ. पीयूष कहते हैं कि पूरी उम्मीद है कि पार्टी के दोनों गुटों में सुलह हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने पांच साल अच्छा काम किया है। कार्यकर्ता चाहते हैं कि उन्हीं के नाम पर चुनाव लड़ा जाए।