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Varanasi News: जिंदा या मृत यह पुलिस को पता नहीं, 25 वर्षों से चल रही मुकदमेबाजी; मुल्जिम नहीं किए जा सके पेश

Tue, 18 Jun 2024 05:50 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: जिला एवं सत्र अदालत में वर्षों से लंबित आपराधिक मामलों के कई मुल्जिम ऐसे हैं, जिनके बारे में पुलिस को यह पता ही नहीं है कि वह जिंदा हैं या उनकी मौत हो गई है। पुलिस ऐसे मुल्जिमों को फरार बता कर अदालत में चार्जशीट दाखिल करने के बाद बेफिक्र है। 
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जिंदा या मृत यह पुलिस को पता नहीं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इन मुल्जिमों से संबंधित मुकदमे के वादी और गवाह तो अदालतों तक पहुंचे। मगर, मुल्जिमों को पुलिस अदालत में पेश नहीं कर सकी। लिहाजा, ऐसे मुल्जिमों के खिलाफ स्थायी वारंट जारी होने के बाद उनसे संबंधित मुकदमे की फाइल जिले की अलग-अलग अदालतों में फाइलों के ढेर में दबी हुई है। अदालत को भी इंतजार है कि इन मुल्जिमों को पुलिस पेश करे तो उनके मुकदमे से संबंधित फाइल पर सुनवाई शुरू हो।

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केस-1: 1997 में दर्ज हुआ था हत्या और अपहरण का केस

गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद थाना के महरूपुर निवासी अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर और सहाबुद्दीन के खिलाफ वर्ष 1997 में भेलूपुर थाने में हत्या और अपहरण सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ था। दोनों से संबंधित प्रकरण सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। दोनों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित है। दोनों के केस और उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में पूछने पर पुलिस दबी जुबान बस इतना ही कहती है कि संभवत: वे नेपाल या दुबई में छुपे होंगे।

केस-2: 50 हजार का इनामी अजीम 12 साल से है भगोड़ा घोषित
चौबेपुर थाना के धन्नीपुर पंचरावा गांव का निवासी अजीम अहमद वर्ष 2002 से जरायम जगत में सक्रिय है। 2012 में शिवपुर थाने में उसके खिलाफ हत्या व रंगदारी सहित अन्य आरोपों और गैंगस्टर एक्ट के तीन मुकदमे दर्ज हुए। वर्ष 2012 में ही भेलूपुर थाने में अजीम के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। अजीम अहमद पर वर्ष 2012 में ही 50 हजार का इनाम घोषित हुआ। वर्ष 2013 में अजीम के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई हुई। इसके बाद से वह फरार घोषित है।

केस-3: रंगदारी मांगने के 13 वर्ष बाद भी पता नहीं लगा
कानपुर के लाजपत नगर निवासी कमल भगनानी के खिलाफ वर्ष 2011 में सिगरा थाने में रंगदारी मांगने और धमकाने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। वर्ष 2013 में उसके खिलाफ पांच हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ। कमल को भगोड़ा घोषित कर उसके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। सिगरा थाने की पुलिस ने कई बार कमल के कानपुर स्थित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी और उसके बारे में सटीक जानकारी नहीं मिली।

केस-4: दो भाई मारे गए, तीसरा है एक लाख का इनामी
रोहनिया थाना क्षेत्र में दरोगा को गोली मार कर असलहा लूटने का आरोपी बदमाश रजनीश सिंह उर्फ बउआ और उसका भाई मनीष नवंबर 2022 में बड़ागांव क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। दोनों के भाई लल्लन सिंह पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। नवंबर 2022 से अब तक पुलिस लल्लन सिंह का पता नहीं लगा सकी। लल्लन सिंह के खिलाफ अदालत में पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। मगर, लल्लन को पकड़ कर अदालत में पेश करना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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सूची लंबी है और अदालत में पेश कर पाना उतना ही मुश्किल

जिले में फरार मुल्जिमों की संख्या लंबी है और उन्हें अदालत में पेश करना पुलिस के उतना ही मुश्किल टास्क है। कपसेठी थाना क्षेत्र के बरकी गांव का अंगनू बिंद हत्या के मामले में वर्ष 1997 से फरार है। शिवपुर थाना के वीडीए कॉलोनी का राहुल सिंह अपहरण और दुष्कर्म के मामले में वर्ष 2016 से फरार है। 

राहुल सिंह पर 2500 का इनाम है। चौबेपुर थाना के धौरहरा का इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी हत्या के मामले में वर्ष 2013 से फरार है। उस पर एक लाख का इनाम है। कैंट थाने की पुलिस को वर्ष 2013 से एक लाख के इनामी लखनऊ निवासी सलीम उर्फ मुख्तार शेख की तलाश है। 

कैंट थाने की पुलिस को चोलापुर क्षेत्र के गोसाईपुर निवासी 50 हजार के इनामी सुनील यादव की वर्ष 2013 से तलाश है। कपिलेश्वर गली निवासी 50 हजार के इनामी विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली की चौबेपुर थाने की पुलिस को वर्ष 2005 से तलाश है।
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