इसके एवज में मोटा कमीशन भी लिया गया। साथ ही एक करोड़ रुपये और रख लिए गए। इसका बंटवारा 30 मई को शुरू हुआ। एक बर्खास्त दरोगा को पांच लाख रुपये दिए गए, लेकिन वह 25 लाख की मांग पर अड़ गया। यहीं से बात बिगड़ गई। दरोगा ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस के एक अफसर को दी। अफसर ने जिम्मेदारों को बुलाया और एक करोड़ रुपये रखवा लिया।
इसके बाद अजीत, घनश्याम व उसके सहयोगियों को थाने बुलाया गया। घनश्याम व उसके सहयोगियों से 60 लाख रुपये वसूले गए, फिर थाने से जाने दिया गया। 31 मई को लावारिस कार की डिकी से 92.94 लाख रुपये की बरामदगी की कहानी गढ़ी गई। चार जून को डकैती का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरे मामले में पुलिस की भूमिका रही है। सब कुछ पुलिस की जानकारी में हुआ था।
डकैती के मुख्य आरोपी अजीत मिश्रा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराने के लिए भेलूपुर थाने की पुलिस ने अदालत में मंगलवार को अर्जी दी है। भेलूपुर थानाध्यक्ष ने बताया कि अजीत मिश्रा सहित अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। गैर जमानती वारंट मिलने के बाद अजीत मिश्रा के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुर्की की अनुमति भी अदालत से मांगी जाएगी।