बच्चे के परिजन ब्लड बैंक से निकल कर सड़क पर घूम रहे थे कि इसी बीच सादे कपड़ों में मौजूद एक दरोगा ने उन्हें आवाज दी। अशरफ ने आंसू पोंछते हुए दरोगा को परेशानी बताई तो उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। रात करीब 2:30 बजे सिपाही राकेश सरोज ने आकर रक्तदान किया।
अशरफ ने कहा कि जब वह खुद और रिश्तेदार भी काम नहीं आए तो राकेश बच्चे के लिए फरिश्ता बनकर आए। वह राकेश को उम्र भर याद रखेंगे। पुलिस कैसी होती है, यह सबको बताएंगे। वहीं, इससे गदगद परिजन राकेश को कभी फरिश्ता तो कभी गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताते रहे।
सोशल मीडिया पर राकेश की सराहना हुई तो विभागीय अधिकारियों को भी इसकी जानकारी हुई। सीओ चेतगंज अंकिता सिंह और इंस्पेक्टर चेतगंज प्रवीण कुमार ने राकेश को बुके देकर सम्मानित किया।
सीओ चेतगंज ने बताया कि एक दिन की विशेष छुट्टी देने के साथ ही राकेश को महीने का सर्वश्रेष्ठ आरक्षी घोषित किया जाएगा। ड्यूटी के अलावा सामाजिक सरोकार के प्रति राकेश ने जो संवेदनशीलता दिखाई, इसके लिए उन्हें उच्चाधिकारियों से भी पुरस्कृत कराया जाएगा।