सीएमओ डॉ प्रीतम शुक्ला ने बताया कि ये हस्ताक्षर जिस दिन के हैं, उस दिन वह जिले में नहीं थे, वह शादी में गए हुए थे। उसके बाद वहीं से हाईकोर्ट चले गए थे। यानी, सीएमओ को भी नहीं पता है कि ये दस्तखत कब के हैं। इसके अलावा बिना टेंडर के 50 लाख तक का भुगतान करने का प्रयास किया गया। यही नहीं, जो बिल लगाया गया है वह सत्यापित नहीं है। बिना सत्यापन किए ही तीन लाख रुपये का भुगतान कर भी दिया गया है।