धुंध की चादर से ढका रहा शहर
- फोटो : अमर उजाला
मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय ने बताया कि आसमान में क्लाउट की स्थिति है। इसके कारण धरती का प्रदूषण आसमान में नहीं पहुंच रहा है। कई दिनों से स्माग के कारण धुआं और धूल ऊपर नहीं जा रहा है। इस वजह से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
बार-बार बन एवं उखड़ रही सड़कों के कारण सड़कों पर फैली कंक्रीट, सीमेंट, स्टोन, डामर, मिट्टी ग्रीन हाउस गैस का कारक बन रही हैं। साथ ही सड़क या भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी कम घातक नहीं है।
इसके कारण वातावरण में नाइट्रोजन डाई आक्साइड, सल्फ र डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड आदि विषैली गैस निकलती हैं। बुधवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 332, मंगलवार को 240, सोमवार को 349, रविवार को 340 दर्ज किया गया।
धुंध की चादर से ढका रहा शहर
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सांस के रोगी परेशान
वायु प्रदूषण के कारण सांस के रोगियों की परेशानियां बढ़ी हैं। सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में 20 से अधिक लोगों ने सांस फूलने और आंखों में जलन की शिकायतों के साथ इलाज कराने पहुंचे।
ये हैं मानक
- किसी भी निर्माण कार्य से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी होती है।
- बोर्ड का काम है कार्य शुरू व समाप्त होने पर उस क्षेत्र का प्रदूषण स्तर चेक करें।
- साथ ही बीच-बीच में भी प्रदूषण स्तर चेक करना चाहिए।
- अगर लंबे समय तक निर्माण चलना है तो क्षेत्र को प्लास्टिक या पर्दे से ढंक दिया जाए
बचने के आसान उपाय
- घर के बाहर मास्क लगाकर निकलें।
- एन-95 से ऊपर के ही मास्क खरीदने चाहिए।
- घर में धूल और मिट्टी जमा न होने दें।
- सांस लेने में दिक्कत आने पर डाक्टर से संपर्क करें।
- पानी भी अधिक पिएं।