सुर गंगा संगीत महोत्सव में कवि सम्मेलन
संगीत महोत्सव में कविताओं की फुहार में शनिवार की रात काशीवासी खूब भींगे। ‘मुस्कान’ नामक इस निशा में हास्य-व्यंग्य के बाण चलाए गए। प्रख्यात हास्य कवियों ने चुटीले व्यंग्य से हंसाते-हंसाते लोटपोट कर दिया। कवियों ने स्वच्छ भारत अभियान को लेकर भी चुटकी ली तो साथ ही स्वस्थ समाज को लेकर संदेश भी दिया। यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में बनारस को संगीत का शहर घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित 43 दिवसीय महोत्सव के क्रम में यह निशा महाकवि जयशंकर प्रसाद को समर्पित थी।
भैंसासुर घाट पर बने बिस्मिल्लाह खां पैवेलियन में ग्वालियर से आए प्रख्यात कवि प्रदीप चौबे ने आम आदमी से जुड़े मसलों पर कविताएं पढ़ीं। उनकी पंक्तियां थीं - देखकर आदमी के चेहरे को चुटकुले तक उदास है यारों...। उज्जैन से आए गीतकार कैलाश तरल ने स्वच्छ भारत- स्वस्थ भारत के नारे पर कुछ इस तरह कविता पढ़ी। खाके जर्दा जगह-जगह मत थूक रे, बीड़ी वाले बीड़ी मत फूंकरे...। गंदगी फैलाओगो तो बीमारियां बुलाओगे/स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत किस तरह बनाओगे...।
भोपाल से आए राकेश वर्मा हैरत, संगीता सरल, मिर्जापुर की पूनम श्रीवास्तव, कवि सलीम शिवालवी ने भी दिल को छू लेने वाली कविताएं प्रस्तुत कीं। देहरादून से आए युवा कवि श्रीकांत श्री, इंदौर से आए सत्येंद्र वर्मा ने राष्ट्रप्रेम पर कविताएं पढ़ीं। चपाचप बनारसी, टुंडला से आए लटूरी लट्ठ, इलाहाबाद से आए बिहारी लाल अंबर ने तालियां बटोरीं। इस दौरान भैंसासुर घ्ााट पर बड़ी तादाद में श्रोता मौजूद थे।