चुनावी साल शुरू होने से पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने और मंत्रिपरिषद में सहयोगी मनोज सिन्हा के संसदीय क्षेत्र गाजीपुर के दौरे के संकेत और संभावनाएं स्पष्ट हैं। माना जा रहा है कि गाजीपुर में महाराजा सुहेलदेव पर डाक टिकट जारी करने के बाद सभा में उनके संबोधन से प्रधानमंत्री का सियासी संदेश भी साफ हो जाएगा।
पूर्वांचल से बिहार तक के मतदाताओं को अगले चुनाव से पहले ही रिझाने के लिए सभा से पीएम भाजपा के ‘मिशन पूर्वांचल’ को आगे बढ़ाएंगे। प्रदेश सरकार पूर्वांचल विकास बोर्ड का गठन कर चुकी है। ऐसे में पीएम पूर्वांचल के विकास का नया खाका भी जनता के सामने रख सकते हैं।
प्रधानमंत्री लहुरी काशी यानी गाजीपुर से पूर्वांचल में राजभर समुदाय में जनाधार रखने वाली सुभासपा के अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर को सख्त लहजे में बता सकते हैं कि पिछड़ों की पैरवी भाजपा के अलावा और कोई पार्टी नहीं कर सकती है।
बताया जाएगा कि भाजपा में राजभर नेताओं की कमी नहीं है। सुभासपा गठबंधन धर्म का पालन करें नहीं तो उन्हें ‘छोड़ा’ नहीं जाएगा। पार्टी ने ओमप्रकाश राजभर के जवाब में अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व के तौर पर प्रदेश में स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री अनिल राजभर को गाजीपुर की सभा की जिम्मेदारी सौंपी है।
वाराणसी के शिवपुर से विधायक अनिल मूलत: चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र के हैं, जबकि गठबंधन के कारण ओमप्रकाश राजभर गाजीपुर के जहूराबाद से पहली बार विधायक बने हैं। पार्टी बलिया के सकलदीप राजभर को पहले ही राज्यसभा भेज चुकी है। घोसी सांसद हरिनारायण राजभर भी भाजपा के ही हैं।
सभा में सपा-बसपा के संभावित गठबंधन के बाद बदले सियासी समीकरणों में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा एक बार फिर गाजीपुर से चुनाव मैदान में उतारने की अनौपचारिक घोषणा भी हो सकती है। जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री प्रदेश सरकार में शामिल अपना दल (एस) के साथ पिछले सप्ताह हुए विवाद पर भी अपनी राय रख सकते हैं।