देवाधिदेव महादेव की राजधानी और अपने घाटों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध काशी में 12 मार्च को रिश्तों की नई इबारत लिखी गई। वाराणसी से सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काशी दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों 'रस बनारस' से अभिभूत हुए।
काशी के अर्द्धचंद्राकार घाट भारत और फ्रांस की मैत्री के गवाह बने। हर-हर महादेव का जयघोष, फूलों की बरसात, शहनाई की धुन और मिनी भारत की झलक ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभिभूत कर दिया।
अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक अतिथि देवो भव: की तर्ज पर काशीवासियों ने जबरदस्त स्वागत किया। फ्रांस के राष्ट्रपति ने पीएम के साथ गंगा विहार के दौरान भारत की संस्कृति, कला, आध्यात्मिकता के साथ ही घाटों के सौंदर्य को भी निहारा।
घाट और उस पर बिखरी भारतीय संस्कृति की झलक देखकर फ्रांस के राष्ट्रपति खुद को रोक नहीं सकें और बजड़े पर खड़े हो गए। उन्होंने घाट किनारे खड़े काशीवासियों का हाथ हिलाकर अभिनंदन भी किया। उन्होंने मां गंगा की गोद में लगभग 24 मिनट तक नौका विहार कर अस्सी से दशाश्वमेघ घाट के बीच 36 घाटों पर अलग-अलग नजारे देखे।
अस्सी घाट पर 2:16 मिनट पर पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति की फ्लीट पहुंची। पीएम मोदी ने खुद ही फ्रांस के राष्ट्रपति का हाथ पकड़कर घाट की सीढि़यों पर उतारा। उनके साथ सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
पुष्पवर्षा के साथ मेहमानों का स्वागत किया गया। इस दौरान शहनाई की धुन और शुक्ल यजुर्वेद मंत्रोच्चार ने पूरे माहौल को अध्यात्म के रंगों में रंग दिया। शंखनाद, डमरू की ध्वनि और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति को पुष्पक विमान के दर्शन कराए गए।
अस्सी से नाव जब दशाश्वमेध की ओर चली तो गंगा किनारे खड़े लोगों ने हर-हर महादेव, हर-हर मोदी का जयघोष शुरू कर दिया। जनता के उत्साह को देखकर पीएम खुद को रोक नहीं सके और बजड़े पर किनारे आकर हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करने लगे।
पीएम को देख फ्रांस के राष्ट्रपति और सीएम भी पीएम के साथ जनता का अभिवादन करने लगे। नाव अस्सी से आगे बढ़ी तो तुलसी घाट पर श्रीरामचरितमानस पाठ के बीच रामलीला की झांकी नजर आई।
वहीं बगल में महिला पहलवानों की कुश्ती और मलखंभ पर पहलवानों का प्रदर्शन, प्रभु घाट और चेतसिंह घाट पर कलाकारों ने महात्मा बुद्ध के प्रथम उपदेश की झांकी को निहारते हुए अतिथि आगे बढ़े।