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काशी में रिश्तों की नई इबारत, यादगार बना भारत-फ्रांस दोस्ती का 'रस बनारस'

Tue, 13 Mar 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी के घाट और भारतीय संस्कृति की झलक देख अभिभूत हुए फ्रांस के राष्ट्रपति - फोटो : twitter
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देवाधिदेव महादेव की राजधानी और अपने घाटों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध काशी में 12 मार्च को रिश्तों की नई इबारत लिखी गई। वाराणसी से सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काशी दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों 'रस बनारस' से अभिभूत हुए।
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काशी के अर्द्धचंद्राकार घाट भारत और फ्रांस की मैत्री के गवाह बने। हर-हर महादेव का जयघोष, फूलों की बरसात, शहनाई की धुन और मिनी भारत की झलक ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभिभूत कर दिया।

अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक अतिथि देवो भव: की तर्ज पर काशीवासियों ने जबरदस्त स्वागत किया। फ्रांस के राष्ट्रपति ने पीएम के साथ गंगा विहार के दौरान भारत की संस्कृति, कला, आध्यात्मिकता के साथ ही घाटों के सौंदर्य को भी निहारा।
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घाट और उस पर बिखरी भारतीय संस्कृति की झलक देखकर फ्रांस के राष्ट्रपति खुद को रोक नहीं सकें और बजड़े पर खड़े हो गए। उन्होंने घाट किनारे खड़े काशीवासियों का हाथ हिलाकर अभिनंदन भी किया। उन्होंने मां गंगा की गोद में लगभग 24 मिनट तक नौका विहार कर अस्सी से दशाश्वमेघ घाट के बीच 36 घाटों पर अलग-अलग नजारे देखे।  

अस्सी घाट पर 2:16 मिनट पर पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति की फ्लीट पहुंची। पीएम मोदी ने खुद ही फ्रांस के राष्ट्रपति का हाथ पकड़कर घाट की सीढि़यों पर उतारा। उनके साथ सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। 




पुष्पवर्षा के साथ मेहमानों का स्वागत किया गया। इस दौरान शहनाई की धुन और शुक्ल यजुर्वेद मंत्रोच्चार ने पूरे माहौल को अध्यात्म के रंगों में रंग दिया। शंखनाद, डमरू की ध्वनि और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति को पुष्पक विमान के दर्शन कराए गए।

अस्सी से नाव जब दशाश्वमेध की ओर चली तो गंगा किनारे खड़े लोगों ने हर-हर महादेव, हर-हर मोदी का जयघोष शुरू कर दिया। जनता के उत्साह को देखकर पीएम खुद को रोक नहीं सके और बजड़े पर किनारे आकर हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करने लगे।

पीएम को देख फ्रांस के राष्ट्रपति और सीएम भी पीएम के साथ जनता का अभिवादन करने लगे। नाव अस्सी से आगे बढ़ी तो तुलसी घाट पर श्रीरामचरितमानस पाठ के बीच रामलीला की झांकी नजर आई।

वहीं बगल में महिला पहलवानों की कुश्ती और मलखंभ पर पहलवानों का प्रदर्शन, प्रभु घाट और चेतसिंह घाट पर कलाकारों ने महात्मा बुद्ध के प्रथम उपदेश की झांकी को निहारते हुए अतिथि आगे बढ़े। 
 

अश्वमेध का नजारा देख ठहरे कदम 

दोनों अतिथियों ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया स्वीकार - फोटो : अमर उजाला
घाट पर खड़े विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भारत और फ्रांस के झंडों के साथ अतिथियों का स्वागत किया। अखाड़ा श्री निरंजनी घाट पर भस्म श्रृंगार किए नागा साधु मौजूद थे। वहीं, मानसरोवर घाट पर कबीर संकीर्तन कबीरचौरामठ की ओर से संत कबीर के दोहों से अतिथियों का स्वागत किया।

पाण्डेय घाट और चौसट्टी घाट पर बनारस घराने के कलाकारों ने कथक और शास्त्रीय संगीत का रस घोला। नारद घाट पर विशाल खड़ाउ के दर्शन हुए तो अन्य घाटों पर बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गंगा में नौका विहार के वक्त काशी के लोगों ने भी हर हर महादेव के नारे के साथ अपने इस खास विदेशी मेहमान का स्वागत किया तो कही कहीं लोगों ने घाट किनारे ऐतिहासिक भवनों के छत से पुष्प वर्षा भी की। तेज धूप के बाद भी लोगों का उत्साह अपने चरम पर था। 

02 बजकर 40 मिनट पर जैसे ही पीएम  नौका विहार करते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचे तो वहां अश्वमेध यज्ञ का नजारा देख उनके कदम ठहर गए। घाटों पर बैठे लोग हर-हर महादेव के जयकारे लगाते रहे। इस अभिवादन को दोनों अधिकारियों ने बजड़े से अपना हाथ हिलाकर स्वीकार किया। 2 बजकर 45 मिनट पर प्रधानमंत्री का बजड़ा जेट्टी पर आकर रूका।

काफिला जैसे ही दशाश्वमेध घाट से गोदौलिया चौराहेे की ओर बढ़ा उस मार्ग पर दोनों ओर खड़े लोगों ने दोनों देशों का झंडा दिखाकर स्वागत किया। दशाश्वमेध सेे लेकर गिरजाघार चौराहे तक करीब 10 हजार से अधिक बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और विदेेशी पर्यटक स्वागत करने में लगे रहे।

इस दौरान बीच-बीच में ढोल, बैंडबाजा, आदिवासी नृत्य से भी अतिथियों का स्वागत किया जा रहा था। गोदौलिया चौराहे पर भाजपा और अन्य सामाजिक संगठन के लोगों ने पुष्पवर्षा कर प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत किया।
 

काशी के घाटों पर ऐसा रहा नजारा

- फोटो : अमर उजाला
अस्सी घाट
अस्सी घाट पर 121 ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन किया। इसके अलावा सुबह-ए-बनारस के मंच पर 21 शहनाई वादकों ने मंगल ध्वनि से अतिथियों का स्वागत किया तो हरियाणा के कलाकारों ने बीन डांस की प्रस्तुति दी। घाट के उत्तरी छोर पर डमरुओं का नाद और समूह शंखनाद ने तो पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंगों में रंग दिया। मौनी बाबा राम लीला कमेटी की ओर से सजाई गई भरत मिलाप की झांकी के बारे में भी पीएम ने फ्रांस के राष्ट्रपति को जानकारी दी। 
तुलसी घाट
घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर श्रीरामचरितमानस की गायन मंडली ने राम राज्याभिषेक प्रसंग से जुड़ी चौपाइयों का सस्वर पाठ करती रही। ठीक पीछे  घाट की सीढि़यों पर बने मंच पर श्रीराम दरबार का स्वरूप तैयार किया गया था और घाट के दक्षिणी छोर की सीढि़यों पर छात्राओं का समूह भारत और फ्रांस के राष्ट्रीय ध्वज को हाथ में लेकर दोनों नेताओं का अभिवादन कर रहा था। उत्तरी छोर पर काशी की बालिकाएं और पहलवान कुश्ती के धोबिया पाट के दांव-पेच दिखा रहे थे। मलखंभ और जोड़ी गदा भी सभी को अपनी तरफ खींच रही थी। तुलसी घाट पर मोदी और मैक्त्रसें की 50 फुट लम्बी तस्वीर लगायी गयी थी जो सभी के आकर्षण का केंद्र रही। 
प्रभु घाट-चेत सिंह घाट
प्रभु घाट पर सौ से ज्यादा बौद्ध भिक्षु घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर ध्यान मुद्रा में अतिथियों का स्वागत कर रहे थे। उधर, चेत सिंह घाट पर किले के फाटक से लेकर घाट की आखिरी सीढ़ी तक रंगकर्मियों के दल ने बुद्ध के उपदेश पर आधारित नृत्य नाटिका पेश की।  इसके अलावा कथक और भरत नाट्यम शैली की मिली-जुली भाव-भंगिमाएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं। 
निरंजनी घाट
निरंजनी घाट पर काशी की सधुक्कड़ी परंपरा का निर्वाह करने वाले संतों-महात्माओं की अड़ी के नजारे ने सभी को अपनी तरफ खींचा। भष्म और धुनी रमाए घाट पर अलग-अलग समूहों में 108 साधु-संतों को देखकर फ्र ांसीसी दल आश्चर्य में पड़ गया। इस घाट पर भी जगह-जगह केसरिया कपड़ों के छोटे-बड़े फ्रेम लगाए गए थे।
केदार घाट
केदार घाट पर मथुरा के कलाकारों के दल ने मयूर नृत्य और फूलों की होली से अतिथियों की अगवानी की। वृंदावन की मोर कुटी का दृश्य प्रदर्शित करने में गीतांजलि शर्मा और टीवी अभिनेत्री श्रुति शर्मा ने सहयोग किया। 
राजा घाट
राजा घाट पर पेशवाओं की बनारस को दी गई इस धरोहर के साए में सौ से ज्यादा स्कूली छात्राओं ने स्वच्छता गीत पर कथक शैली में नृत्य पेश किया। नैनीताल के डा. डी.एन. भट्ट द्वारा लिखित गीत कूड़ा करकट साफ करेंगे बापू हम, बीमारियों को हाफ करेंगे बापू हम... को बच्चों ने पेश किया। 
राणामहल घाट
राणामहल घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर नगर के युवा संगीतकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इन कलाकारों ने वाद्यवृंद के लिए दोपहर के रागों पर आधारित खास शास्त्रीय धुनें पेश कीं। तबला और सारंगी समेत 50 वाद्य वृंदों से दी जाने वाली प्रस्तुतियों में दीपक और बहार राग के सुरों को आधार बनाया गया था।

दीनदयाल हस्तकला संकुल में संवरे भारत-फ्रांस रिश्तों के शिल्प

varanasi - फोटो : अमर उजाला

दीनदयाल हस्तकला संकुल में भारत-फ्रांस की दोस्ती का नया अध्याय काशी की शिल्प-कला और संस्कृति के विविध रंगों से सजा। फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष इमैनुएल मैक्राें और उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्राें ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ यहां काशी और इसके जीवंत शिल्प को न केवल करीब से देखा, परखा बल्कि उसकी यादें भी संजोईं।

यहां की बेजोड़ हस्तकला और शिल्प के कई रंग अपने साथ ले गए। शाही ठाट में ‘चित्रकूट’ का मंचन देखा। कार्यक्रम महज 20 मिनट का निर्धारित था लेकिन काशी के ताने-बाने में रिश्तों के धागे जुड़ते गए और तकरीबन 50 मिनट तक वह यहां रह गए।

इस दौरान खुद पीएम मोदी अपने विदेशी मेहमानों को बनारस की कला, संस्कृति और हुनर के विविध रंगों से परिचित कराते रहे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति को महिला बुनकरों ने एंबलम भेंट किए। वहीं, फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्राें को यहां की विश्व प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी का झुमका प्रधानमंत्री ने भेंट किया। इससे पहले दोपहर 12:38 बजे पीएम मोदी फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ हेलीकाप्टर से बड़ा लालपुर हेलीपैड पहुंचे। यहां से रेंज रोवर से दोनों राजनेता हस्तकला संकुल रवाना हुए।

दोपहर 12:41 बजे दीनदयाल हस्तकला संकुल पहुंचे। शहनाई की मंगलध्वनि से भव्य स्वागत हुआ। उनके सम्मान में यहां उस्ताद अली अब्बास और उनकी टीम ने शहनाई की मिठास घोली। कजरी ‘....कचौड़ी गली सून कइल बलमू’ और ‘रघुपति राघव राजाराम’ की धुन पर पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष मंत्रमुग्ध नजर आए। उन्होंने कलाकारों से बातचीत की और उन्हें दिल्ली आने का आमंत्रण दिया।

इसके बाद ‘चित्रकूट’ का मंचन देखने एंफीथिएटर पहुंचे। उस वक्त किष्किंधाकांड का प्रसंग मंचित हो रहा था। उनके बैठने के लिए शाही ठाट-बाट वाले इंतजाम किए गए थे। यहां से वे शिल्प संग्रहालय पहुंचे। जहां जरी, जरदोजी, गुलाबी मीनाकारी सहित चार जीआई उत्पादों के अलावा काष्ठ से वस्त्र तक के हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी और उन्हें तैयार करने की कारीगरी का लाइव डेमो देख फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष और उनकी पत्नी अभिभूत नजर आए।

काशी के अलावा अन्य प्रांतों के ख्यात हस्तशिल्प उत्पादों को भी देखा और सराहा। फिर कालीन और घाटों के थ्रीडी डिस्प्ले को वे अपलक निहारते रहे। निकलते समय जब फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष  विजिटर बुक में अपने विचार लिखने बैठे तो भावनाएं उमड़ पड़ीं।

चार से पांच मिनट तक उन्होंने अपनी बात फ्रेंच में लिखी। काशी, यहां के शिल्प और पीएम मोदी को सराहा। दोपहर 1:30 बजे संकुल से वे हेलीपैड के लिए रवाना हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी साथ थे।
 
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मोक्षदायिनी गंगा की लहरों पर लिखा गया इतिहास 

बजड़े पर सवार होकर किया काशी दर्शन - फोटो : twitter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अस्सी घाट से दशाश्वमेध घाट तक नौका विहार करा कर इतिहास लिख दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मिनट की यात्रा में अपने मेहमान को 36 घाटों पर काशी के साथ-साथ समेत उत्तर प्रदेश के बृज और अवध की बहुआयामी संस्कृतियों के दर्शन करा दिए।

गंगा की गोद में छोटी सी यात्रा के दुनिया भर में करोड़ों लोग गवाह बने और शहर के लोगों ने तो मैक्रों के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों देशों के रिश्तों को और प्रगाढ़ करने और इन्हें नई ऊंचाई देने के लिहाज से इस यात्रा का महत्व पीएम मोदी ने डीरेका के कार्यक्रम में भी बताया। कहा, जिस प्रकार आपने फ्रांस के राष्ट्रपति के स्वागत और सम्मान में पलक पांवड़े बिछा दिए, उसके बाद अब दुनिया भर के लोग जरूर पूछेगे कि बनारस कहां है।

स्वागत कार्यक्रम में अद्भुत नजारे के लिए  काशीवासियों को धन्यवाद देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत-फ्रांस की दोस्ती और पक्की होगी।
  भव्य स्वागत सेका आह्लाद उनके बार बार हाथ उठाकर जवाब देने में प्रकट हो रहा था। अस्सी घाट पर पहुंचने के बाद पीएम मोदी का मकरों का हाथ थाम कर चलना संकेत दे रहा था कि चार दिन के दौरे के अंतिम दिन काशी में नया काम मिल गया।

मोक्षदायिनी गंगा की लहरों पर जा दोनों नेता भारत की विभिन्न संस्कृतियों के साक्षी बन रहे थेए काशी की जनताए हाथों में भारत का तिरंगा और फ्रांस के रष्ट्रीय ध्वज लिए स्कूलों के सजे धजे बच्चे और सुर साधकों से लेकर आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करने की कला का साक्षात प्रदर्शन कर उन्हें इसकी प्रमणिक्ता बता रहे थे।

काशी के सांसद बनने से पहले मुझे गंगा मां ने बुलाया है कहने वाले पीएम मोदी इससे पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे को गंगा आरती का दर्शन कर चुके हैं।  मोदी ने खुद को गंगा पुत्र भी बताया था। सोमवार को वह गंगा मां की गोद में थे।
 
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