राष्ट्रबोध का ज्ञान कराने संसदीय क्षेत्र के स्कूलों में दिखाई जा रही लघु फिल्म चलो जीते हैं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन पर आधारित फिल्म चलो जीते हैं के जरिए बच्चों के दिलों पर राज करेंगे मोदी। पीएम के संसदीय क्षेत्र के स्कूलों में इस फिल्म को दिखाने की शुरुआत हो चुकी है। इस फिल्म के जरिए बच्चों को राष्ट्रबोध का ज्ञान कराया जा रहा है। शनिवार को प्रदेश के राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी ने बनारस के छह स्कूलों में बच्चों के साथ फिल्म देखी।
इस दौरान मंत्री ने पीएम का फोटो दिखाकर बच्चों से पूछा कि ये कौन हैं। इस पर कुछ बच्चों ने जवाब दिया की पीएम नरेंद्र मोदी हैं। कुछ बच्चे जवाब नहीं दे पाए तो मंत्री ने बताया कि ये आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इस दौरान एक बच्चे ने कहा इ मोदी बाबा हउअन।
बाल दिवस पर पीएम ने कहा था कि जब एक बच्चा घर में जलते बल्ब के स्विच को बुझाता तो वह राष्ट्र के करोड़ों रुपये बचाता है। कमाना जरूरी नहीं होता है लेकिन बचाना बहुत जरूरी होता है। इसी प्रकार जब मां बच्चे से कहती है कि कूड़ा वाला आया जाओ कूड़ा दे दो। तो, वह बच्चा कहता है कि मां वह सफाईवाला भैया है। इस प्रकार बच्चों की बातों को परिवार में सबसे अधिक तवज्जो दी जाती है।
तिवारी ने कहा कि पीएम के बचपन आधारित फिल्म प्रेरक प्रसंग के रूप में दिखाई जा रही है। इस फिल्म से दूसरों के लिए जीने की कला सिखाती है। जिन तकलीफों को पीएम ने बचपन में झेला और महसूस किया उन्हें योजनाओं के रूप में साकार किया। चाहे बिजली, उज्जवला, आयुष्मान भारत या फिर स्वच्छ भारत मिशन हो।
इंटरनेट के अलावा कई चैनलों पर दिखाई गई फिल्म
पीएम के बचपन पर आधारित फिल्म को हर सरकारी और निजी स्कूलों में दिखाने की योजना
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वल्लभ विद्यापीठ,गुजरात विद्या मंदिर, अग्रसेन डिग्री कालेज, जीजीआईसी, राजकीय क्वींस कालेज, संत अतुलानंद में बच्चों के साथ फिल्म देखी। भाजपा काशी प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि इस फिल्म से बच्चों को परंपरा और संस्कृति के बारे में बताया जा रहा है। फिल्म को हर स्कूल में दिखाने की योजना है। एमएलसी अशोक धवन ने कहा पीएम के बचपन आधारित फिल्म सभी स्कूलों में दिखाने की योजना है।
लगभग 35 मिनट की इस फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज करने के अलावा कई चैनलों पर दिखाया गया है। फिल्म में मोदी के बचपन की कहानियां दिखाई गई हैं। चाय बेचने के जीवन से लेकर उन्हें जीवन में किस तरह आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। उसे प्रसंगों में दिखाया गया है। फिल्म निर्माता महेश हडावले की लघु फिल्म 29 जुलाई को बाक्स आफिस पर रिलीज हो गई है।