प्रशांति सिंह, राम्या सिंह, सविता यादव
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वाराणसी की प्रतिभाएं सफलता के आसमान पर चमक रही हैं। ज्ञान, सामाजिक कार्य, खेल के मैदान से लेकर अभिनय के मंच पर काशी के युवा अपनी चमक बिखेर रहे हैं। सीबीएसई के परीक्षा परिणाम में बनारस की राम्या सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया तो बास्केटबाल में प्रशांति ने अर्जुन अवार्ड से शहर का नाम रौशन किया।
सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कन्या शिक्षा व महिला कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए सम्मनित हुई तो रंगमंच के जरिए सविता यादव ने अपने हुनर का लोहा आज भी देश के विभिन्न राज्यों में मनवा रही हैं। अंतराष्ट्रीय युवा दिवस पर हम इन्हीं युवाओं ने रूबरू होंगे जिन्होंने शहर को अपनी चमक से बुलंदी पर पहुंचाया है।
लगन व मेहनत ने दिलाया मुकाम
टीना डाबी को अपना आदर्श मानने वाली राम्या सिंह आईएएस बनना चाहती हैं। इन्होंने सीबीएसई परीक्षा में 98.8 प्रतिशत अंकों के साथ बनारस की टॉपर बनकर शहर का नाम रौशन किया। राम्या आगे चलकर टीना डाबी की तरह ही सिविल में जाना चाहती हैं। शिक्षक मां पिता की इस बेटी ने कक्षा नौ से ही आंखों में ये सपना पाल लिया था। पॉलिटिकल साइंस इनका फेवरेट सब्जेक्ट है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से आनर्स कर रहीं हैं। पांडेयपुर की रहने वाले राम्या ने परीक्षा के दौरान पांच से छह घंटे पढ़ाई की। राम्या का कहना है कि पढ़ाई को लेकर प्रेशर बिलकुल नहीं लेना चाहिए।
बास्केटबॉल की सितारा बनीं प्रशांति सिंह
कॉमनवेल्थ और दो एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं शिवपुर निवासी बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंह को राष्ट्रपति के हाथों अर्जुन अवार्ड पुरस्कार मिला है। काशी की बेटी यूपी की पहली महिला खिलाड़ी है जिसे यह सम्मान मिला है। बनारस की बास्केेटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंह और उनकी बहनें खेल जगत में सिंह सिस्टर्स के नाम से मशहूर हैं। 2009 एशियन गेम्स में रजत पदक तथा साउथ एशियन बीच गेम्स स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। प्रशांति बताती हैं दस से ग्यारह साल की उम्र से ही इस खेल की ओर आकर्षित हो गई थी और आगे भी खेल की बेहतरी के लिए करना काम करना चाहती हूं।
चुनौतियों संग बनाया खुद का रास्ता
सविता यादव, स्वाती सिंह
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नागेपुर निवासी स्वाती सिंह ने महिलाओं के स्वास्थ्य, विकास और स्वच्छता से जुड़ा ऐसा विषय है जिस पर शर्म करना और चुप रहना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। स्वाती सिंह पढ़ाई के दौरान ही इन मुद्दाें पर सक्रिय हो चुकी थी। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर के आसपास 30 गांवों में मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने के लिए मुहीम संस्था बनाकर पीरियड अलर्ट के लिए काम करती है। स्वाती एक स्वतंत्र लेखक है उनकी पहली किताब कंट्रोल जेड साल 2017 में प्रकाशित हुई। इन्हें काका साहेब कालेकर व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिला कल्याण के क्षेत्र में भी पुरस्कार प्राप्त है।
रंगमंच में सविता की दस्तक
नाटक में काम करने के बाद बडे़ पर्द पर भी बनारस के युवाओं ने बनारस का सितारा बुलंद किया है। कबीरनगर निवासी सविता यादव बचपन से पेटिंग, डांस और अभिनय जैसी कलाओं में इनका मन रमा हुआ था। बतौर थिऐटर आर्टिस्ट सविता ने 2011 में अपनी शुरूआत की। अब तक उन्होंने कई मूवि संग नाटकों में अपने सफल अभियान का कमाल दिखाया है। इनकी लघु नाटक माननी को तीन राष्ट्रीय अवार्ड ने भी नवाजा गया है। सविता नसीरूद्दीन शाह व नवाजु़द्दीन सिद्दिकी को अपना अपना प्ररेणाश्रोत मानती हैं।