प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बनारस के विकास को लेकर पीड़ा यूं नहीं छलकी। जिस तरह केंद्र काशी पर मेहरबान रहा और धनवर्षा होती रही, उस गति से काम होता नहीं दिख रहा है।
अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष में पीएम ने काशी के विकास और बदलाव के लिए 7851 .89 करोड़ रुपये से अधिक दिए हैं, लेकिन परियोजनाओं की कछुआ चाल के चलते अभी तक दिखा कुछ नहीं। यह वजह है कि सोमवार को लखनऊ की रैली के दौरान पीएम की यह चिंता सामने आई। उनको कहना पड़ा कि वह जहां कहते हैं, बनारस में वहां काम नहीं होता।
करीब आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं लागू होने के बाद बनारस में बिजली, पानी, अच्छी सड़कों के साथ ही कूड़ा निस्तारण और सफाई के लिए जनता को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
बीते साल में आईपीडीएस की शुरुआत केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने की थी। मॉडल कार्य के रूप में कबीर नगर कॉलोनी के 3200 घरों में भूमिगत बिजली आपूर्ति की व्यवस्था होगी। विकास कार्यों की धीमी प्रगति की पीएम की चिंता बीते 22 दिसंबर, 2016 को तब सामने आई थी, जब वह काशी आने पर कबीरनगर के कार्य का निरीक्षण करने पहुंच गए थे।
धीमी रफ्तार से चलने वाली केंद्र की योजनाओं में एक इलाहाबाद-हल्दिया जल परिवहन योजना भी है। कछुआ सेंक्च्युअरी के प्रतिबंधों के चलते यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। गंगा में जलपोत जो एक बार आया तो फिर नहीं लौटा।
इतना ही नहीं, अनुमति के फेर में जलपोत महीने भर से अधिक समय तक आदिकेशव घाट के पास ही खड़े रहे। इसके अलावा रिंग रोड, अमृत योजना और हृदय योजना के तहत काशी को संवारने का सपना भी अभी साकार नहीं हो सका है।