विधानसभा चुनाव के मद्देनजर काशी में पीएम मोदी का तीन दिनी प्रवास रंग लाया। पीएम मोदी के काशी प्रवास और पूर्वांचल के सभी जिलों में रैलियों का असर यह हुआ कि सभी 61 सीटों पर भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के मानें तो बीजेपी के पूर्वांचल विजय के पीछे मोदी की नई सोशल इंजीनियंरिंग है। इसी सोशल इंजीनियरिंग ने पूरे पूर्वांचल में कमल खिलाया। इस रणनीति के तहत भाजपा ने दलित, अति दलित, पिछडों को जोड़ने का प्रयास किया।
इसके लिए बीजेपी पिछले दो साल से प्रयास कर रही थी। इसी के तहत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में राजभर सम्मेलन, दलित सम्मेलन आदि किए गए। इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल, भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया।
इसी रणनीति के तहत केशव प्रसाद मौर्य को यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वहीं मौर्य बिरादरी में अच्छी पकड़ रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को भी पार्टी से जोड़ा गया। इससे गैर जाटव दलित, अति पिछड़े, पिछड़े, सवर्ण वोटों के डेडली कंबिनेशन से भाजपा ने पूर्वांचल के किले को फतह किया।
बीएसपी के बेस वोट बैंक को खाली कर पूर्वांचल में कमल खिलाया
bjp worker in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
इसी रणनीति के तहत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूरे प्रदेश में कई जगहों पर दलितों के घर जाकर भोजन किया। उन्हें अहसास कराना कि सबका साथ सबका विकास ही सबके हित में हैं। बता दें कि पूर्वांचल की हरेक सीट पर इन जातियों के 15 से 25 हजार वोटर हैं ।
इस तरह भाजपा ने बीएसपी के बेस वोट बैंक को खाली कर पूर्वांचल में कमल खिलाया। पूर्वांचल विजय की यह पूरी पटकथा काशी में रची गई। पूरी केंद्रीय कैबिनेट, पीएम मोदी, अमित शाह ने बनारस में रुक पूर्वांचल विजय के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
इसी रणनीति का असर यह हुआ यह कि सारे विरोधी धराशायी हैं। बता दें कि विधानसभा चुनाव के छठें और सातवें चरण के चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने धुआंधार प्रचार किया था। बलिया, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर हुई पीएम मोदी ने कांग्रेस, सपा, बसपा मुक्त उत्तर प्रदेश का नारा दिया था।