दुर्गाकुंड से कंदवा में देवायतनों का दर्शन-पूजन और रात्रि विश्राम करते हैं। दूसरे पड़ाव भीमचंडी में दर्शन, तीसरे पड़ाव वरुणा नदी में स्नान कर रामेश्वर का दर्शन पूजन और विश्राम करते हैं। इसके बाद चौथे पड़ाव शिवपुर में रुककर पांचवें पड़ाव कपिलधारा होते हुए मणिकर्णिका पर यात्रा का समापन होता है।
यात्रा के दौरान 108 तीर्थस्थल पड़ते हैं। इनमें 56 शिवलिंग, 11 विनायक, 10 शिवगण, 10 देवियां, 4 विष्णु, 2 भैरव और 15 तीर्थ शामिल हैं।