देर से निर्माण शुरू होने के बावजूद निर्धारित समय से पहले बनकर तैयार हुआ सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
काशी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के हस्तशिल्प को नई तकनीक और संसाधनों के जरिए वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए बने ट्रेड फैसिलिटी सेंटर (टीएफसी) के लोकार्पण के साथ शिल्पियों, बुनकरों के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी।
प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण के लिए यह सेंटर सज-संवरकर तैयार है। 22 सितंबर को काशी आगमन के बाद प्रधानमंत्री सबसे पहले इस बहुउद्देश्यीय परियोजना को जनता को समर्पित करेंगे। हैंडलूम के संरक्षण, संवर्द्धन और विस्तार के देश भर में अपनी तरह के इस अनूठे केंद्र के प्रति प्रधानमंत्री की खास रुचि ही रही कि साल भर देर से निर्माण शुरू होने के बावजूद इसे निर्धारित समय से पहले ही बनाकर तैयार कर दिया गया।
लोकार्पण के बाद इस चमचमाते सेंटर में काशी का ताना-बाना झलकेगा, साथ ही पूर्वांचल भर के हैंडलूम उत्पादों की चमक पूरी दुनिया के लिए आकर्षण बनेगी।यहां एक ही छत के नीचे न केवल बुनकर शिल्पी अपने उत्पाद की प्रदर्शनी लगा सकेंगे बल्कि क्रेता-विक्रेता के बीच सीधा व्यापार होगा।
इस केंद्र के जरिए आसपास के राज्यों के शिल्पियों, बुनकरों को भी लाभ पहुंचेगा। विश्व प्रसिद्ध बनारसी सिल्क और हथकरघा से संबद्ध 20 हजार हैंडलूम के जरिए साठ हजार बुनकरों की आजीविका जुड़ी है। मंगलवार को दिन भर यहां युद्धस्तर पर तैयारियां चलीं। दीवार, फर्श और शीशों को चमकाया जाता रहा।
फ्रेम हैंडलूम में ताना बाना सजाया जा रहा था तो वहीं दूसरे हॉल में भदोही की कॉलीन दीवारों पर चमक रही थी। यहां म्यूजियम में सारनाथ की पुरातात्विक वस्तुओं के प्रतिरूप भी दिखेंगे तो रामनगर की रामलीला और घाट पर नौकाओं की झांकियां भी।
प्रधानमंत्री ने 22 दिसंबर 2016 को व्यापार सुविधा केंद्र के प्रथम चरण के तहत म्यूजियम, क्राफ्ट बाजार और प्रवेश प्लाजा का लोकार्पण किया था।
एक ही छत के नीचे व्यापार और पर्यटन
ट्रेड फैसिलिटी सेंटर
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एक ही छत के नीचे बुनकरों, शिल्पियों को सभी कारोबारी सुविधाएं मुहैया होंगी। वहीं, पर्यटन को भी नई ऊंचाई मिलेगी। यहां का संग्रहालय दुनिया को शिल्प और बुनकरी की खूबसूरती बताएगा। यहां आने वाले लोग म्यूजियम में काशी की संगीत और कला के भी दर्शन कर सकेंगे। रामनगर, चुनार, आजमगढ़, जौनपुर के क्राफ्ट भी यहां डिस्प्ले किए गए हैं।
ट्रेड फैसिलिटी सेंटर का उद्देश्य
- प्राचीन नगरी वाराणसी के समृद्ध क्राफ्ट संस्कृति का संरक्षण और विकास
- हथकरघा और हस्तशिल्प ब्रांड के प्रदर्शन के लिए उचित वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराना
- शिल्प उत्पादों के लिए घरेलू बाजार के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना
- घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिल्प संवर्धन के जरिए पर्यटन विकास
ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में हैं ये सुविधाएं
ट्रेड फैसिलिटी सेंटर
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ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में व्यापार सुविधा केंद्र के अंतर्गत बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर सहित तीन अतिरिक्त फ्लोर निर्मित किए गए हैं। दो स्तरीय बेसमेंट में लगभग 400 चार पहिया वाहन खड़े हो सकते हैं। भूतल पर कार्यालय के अतिरिक्त 11 मार्ट, लगभग 2000 व्यक्तियों की क्षमता का कन्वेंशन सेंटर, फूड कोर्ट, 14 दूकानें, पूछताछ केंद्र, प्रवेश प्लाजा, गैलरी तथा एंफीथिएटर।
प्रथम तल पर 13 मार्ट, दो एटीएम, प्रदर्शन गैलरी, दो रेस्तरॉ, 14 दूकानें, लाउंज, सिल्क गैलरी, कारपेट गैलरी तथा इतिहास एवं संगीत गैलरी। द्वितीय तल पर व्यापार केंद्र, सभागार, व्यापार व सूचना का राष्ट्रीय केंद्र, चार दूकानें, 15 डारमेट्री, कार्यालय, पुस्तकालय, रिकॉर्ड रूम, चलचित्र हाल आदि।
तृतीय तल पर 13 कार्यालय तथा व्यापार केंद्र के अतिरिक्त 18 अतिथिगृह कॉमन हाल, पैंट्री तथा कार्यालय। संपूर्ण परिसर पूर्णतया वातानुकूलित तथा पॉवरबैकअप की सुविधा से लैस है।
परिसर में 13 लिफ्ट, दो सामग्री लिस्ट, दो स्वचालित सीढ़ियां हैं। भवन के स्वप्रयोग के लिए 100 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित है।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर एक नजर
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शिलान्यास- सात नवंबर 2014
कार्य प्रारंभ की तिथि- 28 नवंबर 2015
निर्माण की समयावधि- 30 सितंबर 2017
कुल निर्मित क्षेत्रफल- 43445 वर्ग मीटर
योजना की समग्र लागत- 305 करोड़
निर्माण परियोजना की प्रस्तावित लागत- 253 करोड़