जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है
पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं बनारस आया था तो एक विश्वास लेकर आया था। विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था, आप पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है लेकिन मुझे याद है, तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे। कैसे होगा., होगा ही नहीं., यहां तो ऐसे ही चलता है।
ये मोदी जी जैसे बहुत आके गये। मुझे आश्चर्य होता था कि बनारस के लिए ऐसी धारणाएं बना ली गई थीं। ऐसे तर्क दिये जाने लगे थे। काशीखंड में भगवान शंकर ने खुद कहा है- विना मम प्रसादम् वै, क: काशी प्रति-पद्यतेऽ। अर्थात बिना मेरी प्रसन्नता के काशी में कौन आ सकता है, कौन इसका सेवन कर सकता है? काशी में महादेव की इच्छा के बिना न कोई आता है, और न यहां उनकी इच्छा के बिना कुछ होता है। यहां जो कुछ होता है, महादेव की इच्छा से होता है। ये जो कुछ भी हुआ है, महादेव ने ही किया है।