करीब चार दशक बाद मदनपुरा की सड़कों पर कोई प्रधानमंत्री आने वाला था। सड़क से लेकर छतों, बारजों तक भीड़ बेशुमार थी और उतनी ही कयासें भी। मुस्लिमों की बस्ती, बुनकरों का ताना-बाना, पीएम नरेंद्र मोदी की हिंदुत्ववादी छवि। सवाल कई थे। जितने मुंह उतनी बात। लेकिन, जैसे ही मोदी का काफिला मदनपुरा पहुंचा, सारे सवाल मानो खुद ही हवा हो गए।
यहां बुनकर बावनी के तंजीम ने मोदी को गुलदस्ता और शॉल भेंट किया। जब उनकी यह भेंट पीएम मोदी ने सिर-माथे लगाई तो लोगों के दिल खिल उठे। बुनकर बहुल मदनपुरा निहाल हो उठा। दोपहर करीब पौने एक बजे सोनारपुरा होते हुए प्रधानमंत्री का रोड शो मदनपुरा पहुंचा।
सफेद लकदम कुर्ता पायजामा और टोपी से पटी भीड़ के बीच खुली सफारी पर पीएम मोदी हाथ हिलाकर सबका अभिवादन करते आगे बढ़ रहे थे। कहीं उन पर पुष्पवर्षा हो रही थी तो कहीं मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे। पीएम के इस्तकबाल के लिए बुनकर बहुल इलाके में जबरदस्त हुजूम था।
बुनकर बिरादराना तंजीम बावनी की ओर से बाकायदा उनके स्वागत के लिए मंच लगाया गया था। मंच पर सरदार मुख्तार महतो खुद गुलाब के फूलों का गुलदस्ता और शॉल लेकर खड़े थे। हालांकि पीएम का काफिला मंच के आगे बढ़ गया लेकिन तभी पीएम की नजर पड़ी।
उन्होंने गाड़ी रोकने का इशारा किया। फिर सरदार की ओर मुखातिब हुए। सरदार ने पूरी आत्मीयता के साथ उन्हें गुलदस्ता और शॉल भेंट किया। कश्मीरी शॉल पर बुनकरी की बारीक कारीगरी वाली इस शॉल को पीएम ने सिर-माथे लगाया तो हर बुनकर का दिल खिल उठा।