प्लास्टिक को गलाकर 10 सड़कों को बनाने का प्रयोग सफल रहा। इसके बावजूद सड़कों को बनाने में इसका कोई प्रयोग नहीं हो रहा है, जबकि प्लास्टिक का कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यदि शहर के प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सड़क बनाने में होता तो बहुत हद तक कचरे से निजात मिल सकती है।
वाराणसी में प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इस कचरे का प्रयोग हो, इसके लिए गुणवत्ता के तौर प्रयोग के लिए दिल्ली से प्लास्टिक का दाना मंगाकर दस सड़कें बनाई गईं।
इनमें प्रमुख रूप से 80 मीटर की पिशाच मोचन की सड़क ढाई लाख रुपये खर्च करके बर्नाई गई, जबकि महमूरगंज के गोकुल नगर में 400 मीटर साढ़े तीन लाख और मंडुवाडीह में राम नगर कॉलोनी में 250 मीटर की सड़क करीब तीन लाख रुपये खर्च करके बनाई गई।
ये सभी सड़कें ही सफल हैं। इसके बावजूद यहां अब तक कोई प्लास्टिक को गलाकर दाना बनाने की मशीन नहीं लग सकी, जिससे यहां के प्लास्टिक कचरे का न तो निदान हो सका और न ही इसके प्रयोग से आगे सड़कें बनाने की प्रक्रिया चल सकी।
इन सड़कों को बनवाने वाले नगर निगम के एई पीएन पाल ने बताया कि सभी सड़कें सफल हैं और इनके बनाने में लागत भी कम आती है। इस संबंध में नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि शहर में छोटी-बड़ी कुल 10 जगहों पर प्लास्टिक के प्रयोग से सड़कों का निर्माण किया गया है।
इसके लिए प्लास्टिक का दाना दिल्ली से मंगाना पड़ रहा है। यहां भी प्लांट लगाने के लिए नगर निगम प्रयास कर रहा है। यदि प्लांट यहां लग जाता है तो यहां की सड़कें भी प्लास्टिक का प्रयोग कर बनाई जाने लगेंगी।