कोरोना काल में मरने वाले लोगों की सद्गति के लिए सात दिनों तक चलने वाले धर्मानुष्ठान के दौरान शंकराचार्य की मुक्ति कथा को पुस्तक का रूप दिया गया है। शंकराचार्य की शिष्या साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, गंगारविंद मिश्र, डॉ. लता पांडेय व डॉ. मंजरी पांडेय के सहयोग से यह पुस्तक तैयार हुई है। शनिवार को पुस्तक के रूप में शंकराचार्य को समर्पित किया और उन्होंने इस मुक्ति कथा ग्रंथ का विमोचन किया।
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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शंकराचार्य ने कहा कि शारदीय नवरात्र पर श्रीविद्यामठ में शतचंडी महायज्ञ और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। चार हजार मोदकों से गणपति-पूजन, शतचंडी-महायज्ञ, महारुद्र यज्ञ, 64-योगिनियों के रूप में 64 कन्याओं का पूजन, भैरव-पूजन, 108 सुवासिनी पूजन, 11 रुद्र-दंपती पूजन कुंभकोणम् से पधारे प्रवीण के आचार्यत्व में संपन्न होगा। इसके उपरांत सवा लाख मोदकों से हवन होगा। यह अनुष्ठान 15 दिनों का होगा जिसके अंतर्गत यह सभी आयोजन श्रीविद्यामठ में संपन्न किए जाएंगे।
शंकराचार्य महाराज अपराह्न दो बजे जबलपुर के बगलामुखी सिद्धपीठ के लिए रवाना हो गए। वहां पर वे आगामी नौ दिनों तक पराम्बा भगवती की आराधना संपन्न करेंगे।