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पेंशन के लिए मां का शव घर में रखने वाला पीएचडी धारक बेटा गिरफ्तार

Fri, 25 May 2018 10:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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आवास विकास कॉलोनी में वृद्धा अमरावती देवी की मौत का मामला, पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा गया परिजनों को - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के आवास विकास कॉलोनी में वृद्धा अमरावती देवी (80) की मौत के बाद उन्हें जिंदा बताकर शव घर में रखे रहने और चार माह तक उनके खाते से पेंशन के रुपये निकालने के आरोप में बड़े बेटे रवि प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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गुरुवार को लंका स्थित सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक मुहम्मद दानिश की तहरीर पर भेलूपुर थाने में रविप्रकाश के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। मामले में शामिल तीन अन्य बेटों और बेटी के विरुद्ध भी जल्द कार्रवाई हो सकती है। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिवारीजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया। 

कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट स्वर्गीय दयाराम की पत्नी अमरावती देवी आवास विकास कॉलोनी स्थित मकान में पांच बेटों और एक बेटी के साथ रहती थी। बुधवार को घर से दुर्गंध उठने पर आसपास के लोगों ने सौ नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस की छानबीन में पता चला कि अमरावती देवी की मौत बीते 14 जनवरी को ही हो गई थी। मगर, उनको प्रतिमाह मिलने वाली 13 हजार रुपये पेंशन की लालच में बेटे रवि प्रकाश, देव प्रकाश, योगेश्वर प्रकाश, गिरीश प्रकाश और बेटी विजय लक्ष्मी ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया और विशेष प्रकार के केमिकल के लेप के सहारे चार माह दस दिन से घर पर ही रखे थे।

शव पर केमिकल का लेप लगाकर एसी कमरे में रखा जाता था। एक बेटा ज्योति प्रकाश ने विरोध किया तो उसे भाई-बहन ने मारापीटा, जिसके बाद उसने घर छोड़ दिया। पुलिस सड़े-गले शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगी तो चारों भाइयों और बहन ने विरोध करते हुए कहा था कि उनकी मां का मस्तिष्क जिंदा है। उधर, देर शाम हरिश्चंद्र घाट पर वृद्धा का अंतिम संस्कार किया गया और मुखाग्नि सबसे छोटे बेटे गिरीश प्रकाश ने दी।

इस बारे में सीओ भेलूपुर एपी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का समय और वजह स्पष्ट होने के बाद दर्ज कराए गए मुकदमे में शव को छिपाकर रखने सहित अन्य आरोपों से संबंधित धाराएं बढ़ाई जाएंगी।

अन्य तीन बेटे और बेटी भी कार्रवाई की जद में आएंगे। उधर, सेंट्रल बैंक के मैनेजर ने बताया कि जनवरी के बाद से अब तक वृद्धा के खाते से 79800 रुपये रविप्रकाश ने निकाले थे। कस्टम विभाग को सूचित कर उनका खाता बंद कराकर आरोपियों से रिकवरी कराई जाएगी।
 

...तो यूट्यूब में वीडियो देख कर जाना कैसे रखना है शव

- फोटो : अमर उजाला
बातचीत के दौरान ही रविप्रकाश के मुंह से निकला कि यूट्यूब में खोज लीजिए आपको पता लग जाएगा कि जो कोमा में चले जाते हैं उन्हें किस विधि से घर पर रखा जाता है। शरीर पर क्या लेप लगाया जाता है।

यूट्यूब में कई ऐसे वीडियो उपलब्ध हैं जिनसे इस संबंध में जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि इसके बाद रवि प्रकाश चुप हो गया और थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला।

...और शाम तक बदल गया बड़े बेटे का सुर
अमरावती देवी का बेटा रवि प्रकाश गुरुवार को दिन भर यह दावा करता रहा कि उसकी मां का मस्तिष्क जिंदा था। शाम के समय जैसे ही उसे पता लगा कि उसके खिलाफ बैंक मैनेजर ने मुकदमा दर्ज कराया है तो वह धाड़ें मारकर रोने लगा।

उसका कहना था कि काश अपने भाई ज्योति प्रकाश की बात मान ली होती तो ये दिन नहीं देखने पड़ते। 15 जनवरी को छोटा भाई ज्योति एंबुलेंस लाकर मां के अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया था लेकिन बाकी चार भाई और बहन ने उसका विरोध किया था। उसके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद वह छोड़ कर चला गया था।

दो दिन से घर में नहीं जला चूल्हा
घटना के बाद लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी इस घर में चूल्हा नहीं जला। भाई-बहन पुलिस की कार्रवाई को लेकर आशंकित थे। वहीं, अमरावती देवी की मौत के बाद उनके शव को चार माह दस दिन तक रखने का मामला सार्वजनिक हुआ तो गुरुवार को को आवास विकास कॉलोनी के सामने से गुजरने वाला हर शख्स उनका घर देख ठहर जा रहा था।

घटना को लेकर चंद कदम दूर स्थित दुर्गाकुंड पुलिस चौकी के समीप की चाय-पान की दुकानों पर सुबह से लेकर देर रात तक चर्चाओें के दौर जारी रहे।
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पीएचडी हूं मगर मां की सेवा की खातिर नहीं की नौकरी

- फोटो : अमर उजाला
 वृद्धा अमरावती देवी के शव का पोस्टमार्टम हो गया लेकिन उनके चार बेटे और बेटी यह मानने को तैयार नहीं कि उनकी मौत हो गई है। सभी का कहना था कि उनकी मां का मस्तिष्क जिंदा था और नाड़ी चल रही थी। बावजूद इसके पुलिस ने उनकी मां को मृत बताकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

जबकि, उन्हें रोजाना जापानी ऑक्सीजन, ग्लूकोज और अन्य दवाएं पानी में मिलाकर दी जाती थीं। यदि पेंशन के लिए जिंदा रखने का नाटक करना होता तो उनके खाते में 70 हजार से ज्यादा की रकम न छोड़े होते और सारा रुपया एक बार में ही निकाल ले जाते।

हालांकि उनके इस दावे को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस के मुताबिक, चिकित्सकों की ओर से मृत घोषित किए जाने के बाद ही किसी भी शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है। शव से इतनी दुर्गंध उठ रही थी कि उसे समेटकर पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाना मुश्किल था।

उधर, रवि प्रकाश ने कहा कि बीएचयू से 2004 में  समाजशास्त्र से पीएचडी करने के बाद उसेे बलिया, जौनपुर और मिर्जापुर के प्राइवेट कॉलेजों में 20 हजार तक की नौकरी मिल रही थी। मगर, मां की बीमारी के कारण उनकी सेवा करने के लिए नौकरी नहीं की।

मां कहती थी कि तुम कहीं और चले जाओगे तो मेरी सेवा कौन करेगा। बताया कि देव प्रकाश घर में मोमोज की दुकान खोला था लेकिन कारीगर भाग गया। एक भाई सोडा की एजेंसी में काम करता था।

हमारे घर की बिजली तीन साल से कटी हुई है और मां को एसी कमरे में नहीं रखा गया था। मुहल्ले के कुछ लोग चिढ़ते थे और उन्होंने ही पुलिस को गलत सूचना दी। हम पागल हैं क्या कि शव को घर में रखकर रहते।
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