बैठक में बताया गया कि सभी विभागों को यह स्वतंत्रता दी जाएगी कि वे पीएचडी प्रवेश के लिए साक्षात्कार से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट करें। अब विभाग यह तय कर सकेंगे कि एक स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए। इस स्क्रीनिंग परीक्षा के स्वरूप या अन्य पक्षों पर निर्णय विश्वविद्यालय स्तर की एक समिति करेगी, जिसके गठन को काउंसिल की ओर से मंजूरी दे दी गई है।
मुख्य और एलाइड विषयों की एक मेरिट बनेगी: दूसरे प्रस्ताव के तहत अब पीएचडी प्रवेश के लिए विभागों में मुख्य विषय और एलाइड विषयों की एक समावेशित मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
कुल सीटों के आधार पर होगी आरक्षित सीटों की गणना
एकेडमिक काउंसिल ने उस प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई है जिसके तहत आरक्षित सीटों की गणना विभाग की कुल सीटों (मुख्य परिसर, महिला महाविद्यालय, दक्षिणी परिसर, संबद्ध महाविद्यालय आदि सभी को मिलाकर) के आधार पर करते हुए सभी श्रेणियों की सीटों की सूचना प्रवेश के पहले ही अभ्यर्थियों को दे दी जाएगी। इसके बाद संबंधित इकाइयों में आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों का आवंटन उसी श्रेणी के आधार पर किया जाएगा, ताकि किसी भी वर्ग के अभ्यर्थी को नुकसान न हो और प्रक्रिया आराम से आगे बढ़े।
देशभर के प्रतिभावान विद्यार्थी आएंगे : वीसी
कुलपति ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णयों से देशभर से प्रतिभावान विद्यार्थी विश्वविद्यालय की ओर तो आकर्षित होंगे। साथ ही प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से कम अवधि में पूरा भी किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के समय से पूरा होने से न सिर्फ शैक्षणिक सारणी का प्रभावी रूप से संचालन संभव होगा बल्कि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।